वाराणसी। युवक की हत्या से आक्रोशित लोगों ने पुराना पुल चौकी के समीप वाराणसी-गाजीपुर मार्ग पर जाम लगा दिया। सभी का कहना था कि लेनदेन के विवाद में धनंजय के दोस्तों ने ही उसकी हत्या की है। तकरीबन पांच घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद शाम चार बजे पुलिस ने ठोस कार्रवाई का आश्वासन देकर जाम खत्म कराया।
सारनाथ थाना अंतर्गत खालिसपुर निवासी धनंजय राय लगभग चार साल पहले तक जनसेवा केंद्र संचालित करता था। इसके बाद वह लोगों से कमीशन लेकर बैंक से उनका लोन स्वीकृत कराने का काम कर रहा था। सोमवार की सुबह भी धनंजय घर से क्षेत्र में निकला था। रात में उसने अपने भाई और पत्नी से थोड़ी देर में आने की बात कही थी। इसके बाद उसका कहीं पता नहीं लगा। मंगलवार की सुबह धनंजय के घर से लगभग साढ़े चार किलोमीटर दूर पुलकोहना की मुस्लिम बस्ती स्थित एक चहारदीवारी के समीप सड़क के किनारे खून से लथपथ औंधे मुंह उसका शव पड़ा मिला। इसकी सूचना नमाज पढ़ने जा रहे दो मासूम भाइयों ने अपने पिता को दी तो पुलिस आई। धनंजय की जेब से मिले आधार कार्ड और मोबाइल से उसकी शिनाख्त कर पुलिस ने परिजनों को सूचना देते हुए शव को पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया। धनंजय को देखे बिना उसका शव पोस्टमार्टम के भेजे जाने नाराज परिजनों ने जाम लगा दिया। गुस्साए लोगों की भीड़ कुछ इस कदर उमड़ी थी कि पुराना पुल से लेकर पंचक्रोशी चौराहे तक सड़क के दोनों तरफ वाहनों की लंबी कतार लगी हुई थी। गुस्साए लोगों को समझाने के लिए सारनाथ सहित चार थानों की फोर्स, पीएसी, क्यूआरटी और सीओ कैंट के साथ एसपी सिटी मौके पर डटे रहे। एसपी सिटी विकास चंद्र त्रिपाठी ने बताया कि धनंजय के छोटे भाई मनोहर की तहरीर के आधार पर सारनाथ थाने में अज्ञात के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया है। घटनास्थल के आसपास लगे सीसी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है और सर्विलांस की मदद से भी सुरागकशी जारी है। परिजनों को आश्वस्त किया गया है कि पारदर्शी तरीके से जांच कर प्रकरण में प्रभावी कार्रवाई की जाएगी। वारदात का खुलासा करने के लिए क्राइम ब्रांच सहित तीन टीम लगाई गई है।
खालिसपुर निवासी धनंजय चार भाइयों में दूसरे नंबर पर था। बड़े भाई संजय ने बताया कि राजनीतिक रूप से वह प्रदेश के मंत्री अनिल राजभर के कार्यक्रमों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेता था। धनंजय सिंहपुर स्थित एक बैंक से लोगों को कमीशन लेकर लोन दिलाने का काम करता था। इधर वह कई लोगों का लोन पास करवाया था। कभी-कभी वह अपने दोस्तों के यहां ही रात में रुक जाता था। इस वजह से सोमवार की रात वह घर नहीं आया तो किसी को भी चिंता नहीं हुई। पांच वर्ष पूर्व सोनी से उसका विवाह हुआ था, फिलहाल दोनों के एक भी बच्चे नहीं हैं। उधर, धनंजय की हत्या की सूचना उसके परिजनों को मिली तो कोहराम मच गया। मां लीलावती की हालत बेसुधों जैसी थी। वह बार-बार यही कह रही थी कि काहे हमरे ललवा क गरदनिया कटलेस हो...। वहीं, पत्नी सोनी अचेत पड़ी हुई थी।
दो माह पहले एक दोस्त का बिजली का बिल जमा करने को दिया था अन्य को
सोनी ने बताया कि दो महीने पूर्व धनंजय ने अपने एक मित्र का बिजली का बिल जमा करने के लिए एक अन्य व्यक्ति को 40 हजार रुपये दिए थे। दो महीने बीत जाने के बाद भी जब दोस्त का बिजली का बिल जमा नहीं हुआ तो वह, उसकी पत्नी और भाभी घर पर आकर तगादा करने लग गई थी। इसे लेकर धनंजय जिसे पैसा दिया था उससे वापस मांगते थे। उस व्यक्ति ने धनंजय को कुछ दिन पूर्व 20,000 रुपये का चेक दिया था लेकिन वह बाउंस हो गया था। परिवार वालों का आरोप है कि बिजली के बिल का पैसा लेने वाले ने ही लेनदेन के विवाद में धनंजय की हत्या की है।
सुबह ही की गई हत्या, कहीं और से लाकर नहीं फेंका गया शव
धनंजय का शव जहां मिला उस इलाके के लोग उससे भलीभांति वाकिफ थे। पहले उस क्षेत्र में जन सेवा केंद्र संचालित करने के साथ ही अब भी धनंजय की आवाजाही वहां लगी रहती थी। पुलिस और स्थानीय लोगों का यह भी कहना था कि धनंजय के गले से बह रहे खून को देख कर यही प्रतीत हुआ कि उसकी हत्या सुबह पांच से छह बजे के बीच घटनास्थल पर ही की गई है। यदि हत्या रात में की गई होती तो खून नहीं बह रहा होता। इसके साथ ही यदि किसी अन्य जगह भी हत्या की गई होती और शव लाकर फेंका गया होता तो रास्ते में खून जरूर गिरा होता।