वाराणसी में बीएचयू परिसर का खूबसूरत दृश्य।
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खेलों को बढ़ावा देने और खिलाड़ियों के प्रोत्साहन के लिए बीएचयू खेल परिषद ने पिछले कई वर्षों से बंद खेल छात्रवृत्ति को फिर से शुरू की गई है। इसमें पहली बार अखिल भारतीय विश्वविद्यालयीय और अंतर जोन विश्वविद्यालयीय प्रतियोगिताओं में पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को 5000 से 35 हजार रुपये दिए जाएंगे। 20 वर्षों से स्थगित अंतर विश्वविद्यालयीय प्रतियोगिताओं में विश्वविद्यालय का प्रतिनिधित्व करने वाले प्रत्येक खिलाड़ियों की फीस माफी की योजना को भी फिर से बहाल कर दिया गया। जो इसी साल जुलाई से लागू होगी।
बीएचयू क्रीड़ा परिषद की 12 सदस्यीय स्थायी समिति की एक बैठक में खिलाड़ियों को छात्रवृत्ति सहित अन्य सुविधाओं पर चर्चा की गई। इसमें 2002 से बंद पड़े 10 बेहतर खिलाड़ियों को मिलने वाली 100 रुपये प्रतिमाह की दर से छात्रवृत्ति की परंपरा को फिर से शुरू कर दिया गया। साथ ही इसे बढ़ाकर 500 रुपये प्रतिमाह किया गया है जो अब 10 की जगह 25 खिलाड़ियों को दिया जाएगा। विशेष खेल उपलब्धि सम्मान विश्वविद्यालय कलर सम्मान को भी फिर से शुरू किया गया है।
बीएचयू क्रीड़ा परिषद के महासचिव प्रो. अभिमन्यु ने बताया कि उक्त निर्णयों के अलावा पहली बार छात्रवृत्ति के अतिरिक्त 50 खिलाड़ियों को समिति ने इंस्टीट्यूट ऑफ एमिनेंस योजना के तहत 5000 रुपये प्रतिमाह टॉप-अप स्पोर्ट्स टैलेंट छात्रवृत्ति देने की योजना है।
साथ ही अखिल भारतीय, इंटर जोनल विश्वविद्यालयीय प्रतियोगिताओं के कुश्ती, एथलेटिक्स, मुक्केबाजी कराटे जैसे एकल खेलों में स्वर्ण पदक विजेता को 35 हजार रुपये, रजत पदक विजेता को 30 हजार, कांस्य पदक विजेता को 25 हजार रुपये पुरस्कार और ब्लेजर दिया जाएगा।
स्वर्ण पदक विजेता टीम के सदस्य को 10 हजार
टीम खेलों के स्वर्ण पदक विजेता टीम के प्रत्येक सदस्य को 10 हजार, रजत को सात हजार और कांस्य को पांच हजार रुपये दिए जाएंगे। इसके लिए समिति ने इंस्टीच्यूट ऑफ एमिनेन्स प्रस्ताव भेज दिया है। जिसकी मंजूरी मिलते ही इसे अगले सत्र से लागू किया जाएगा।
बैठक में लिए गए निर्णयों से खिलाड़ी बीएचयू की ओर आकर्षित होंगे। साथ ही विश्वविद्यालय में खेलों का समुचित वातावरण स्थापित कर राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अन्य क्षेत्रों की तरह खेलों के क्षेत्र मे भी गौरव प्राप्त करना संभव होगा।
प्रो. दिनेश चंद्र राय, उपाध्यक्ष, बीएचयू क्रीड़ा परिषद