वाराणसी। जीएसटी में नए-नए प्रावधान और तमाम विसंगतियों को लेकर कंफेडरेशन ऑफ आल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) की ओर से भारत बंद का शहर में मिला-जुला असर देखने को मिला। शहर के अधिकतर दुकानों के शटर उठे रहे तो कुछ इलाकों में विरोध स्वरूप शटर डाउन रहे।
मलदहिया का मशीनरी मार्केट, मैदागिन, चौक का सुड़िया, लोहता, बड़ी बाजार अन्य क्षेत्रों में दुकानें बंद कर व्यापारियों ने जीएसटी में संशोधन को वापस लेने के लिए नारेबाजी की। जवाहर नगर स्थित प्रधानमंत्री के संसदीय कार्यालय में कैट कारोबारी ज्ञापन सौंपने पहुंचे तो नहीं लिया गया। कार्यालय प्रभारी ने शनिवार को आ रहे वित्त मंत्री के समक्ष ज्ञापन देने का सुझाव देकर कारोबारियों को वापस भेज दिया।
कैट के पूर्वांचल प्रभारी अखिलेश मिश्रा ने कहा कि एक दिवसीय बंदी को विभिन्न व्यापारिक संगठनों ने अपना समर्थन दिया है। प्रधानमंत्री के संसदीय कार्यालय में शनिवार को वित्त मंत्री सुरेश खन्ना मौजूद रहेंगे, अब उन्हें व्यापारियों की समस्याओं से संबंधित ज्ञापन सौंपा जाएगा। कैट की बंदी को सफल बनाने में कैट जिलाध्यक्ष श्याम सुंदर गुप्ता, ज्वाला सिंह, मयंक सोनी, त्रिभुवन शर्मा, शैलेश वर्मा आदि का विशेष सहयोग रहा।
दुकान खोलकर बंदी का विरोध
फेडरेशन ऑफ आल इंडिया व्यापार मंडल व महानगर उद्योग व्यापार समिति के व्यापारियों ने भारत बंदी का विरोध अपनी दुकानें खोलकर किया। व्यापारियों का दावा रहा कि थोक व फुटकर दुकानें पूरी तरह से खुली रहीं। पूर्वांचल मीडिया प्रभारी सोमनाथ विश्वकर्मा ने बताया कि सभी व्यापारियों ने अपनी दुकानें खोल रखी थीं। अध्यक्ष प्रेम मिश्रा, अशोक जायसवाल, अजय जायसवाल बबलू, रजनीश कनौजिया आदि ने बताया कि जीएसटी का सरलीकरण होना चाहिए लेकिन दुकानें बंद करके विरोध दर्ज कराना उचित नहीं है। उधर, काशी व्यापार प्रतिनिधि मंडल के महामंत्री राजकुमार शर्मा ने कहा कि संगठन से जुड़े सभी व्यापारियों की दुकानें खुली रही।