वाराणसी। ग्रामीण आवासीय अभिलेख (घरौनी) का ऑनलाइन वितरण एवं डिजिटल खसरा प्रारूप के शुभारंभ अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वर्चुअल कार्यक्रम में कहा कि गरीबों को हक देने के लिए स्वामित्व योजना नई क्रांति है। मंडलायुक्त सभागार में 33 राजस्व ग्रामों के 1404 लोगों को स्वामित्व योजना के तहत घरौनी प्रपत्र भू-स्वामियों को उपलब्ध कराया गया।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि यह योजना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शिता व गरीबों के प्रति भाव को प्रदर्शित करता है। गांव की आबादी की जमीन पर अपना मकान बनाकर रह रहे लोगों को सरकारी अभिलेखों में मालिकाना हक दिया जा रहा है। इससे अब वह गरीब आदमी अपने उस जमीन का मालिक बन जा रहा है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में आबादी की जमीन पर अपना मकान बनाकर रह रहे गरीब लोगों का उनके उस जमीन पर अब तक मालिकाना हक न होने के कारण गांव के दबंग उनके जमीनों पर कब्जा करते थे। कभी-कभार जब मकान उनके क्षतिग्रस्त हो जाता था, तो दोबारा उसी मकान को गांव के दबंग नहीं बनाने देते थे और उस जमीन पर वे अपना मालिकाना हक जताते थे। उन्होंने बताया कि ऑनलाइन डिजिटल खसरा प्रारूप योजना के तहत प्रदेश की 108848 राजस्व गांवों का ऑनलाइन डिजिटल खसरा बनाया जाएगा।
अब डर खत्म, सुकून से रहेगा परिवार
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पूरा मझिला निवासी रविशंकर से पूछा कि जमीन का मालिकाना हक एवं अधिकार आज उन्हें मिल रहा है, उन्हें कैसा महसूस हो रहा है। रविशंकर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं मुख्यमंत्री को धन्यवाद दिया और कहा, वर्ष 2008 से उनका मकान गांव की आबादी की जमीन पर बना था, लेकिन जमीन का कोई कागज उनके पास नहीं था। इससे उन्हें काफी डर लगता था। गांव के लोगों की नजर भी उनकी जमीन पर लगी रहती थी। लेकिन आज जमीन का मालिकाना हक सरकार से मिलने पर वे तथा उनका पूरा परिवार बेहद खुश व सुकून महसूस कर रहे हैं। रविशंकर ने कहा कि मालिकाना हक मिलने से भविष्य में बैंक से भी ऋण मिलेगा और वह अपना अन्य कार्य भी कर सकेंगे। कमिश्नर दीपक अग्रवाल एवं जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा ने पूरा मझिला निवासी रविशंकर, गजापुर निवासिनी मंजू, मुकरमा निवासी चंद्रबली, लडुवाई निवासी राजेश तिवारी तथा लालपुर निवासी ओमप्रकाश यादव को प्रतीकात्मक स्वरूप घरौनी प्रपत्र उपलब्ध कराया।