न जान की परवाह, न यातायात नियमों का डर। एक साल में 34 हजार लोगों को यातायात नियमों का पाठ पढ़ाया गया। औसतन हर महीने 2,800 लोगों तक पुलिस पहुंची, फिर भी 350 लोगों ने नियमों को तोड़ा। सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूक किए जाने के बाद भी बड़ी संख्या में लोग नियमों की अनदेखी करते पाए गए। हर महीने औसतन करीब 2,800 से अधिक लोगों को जागरूक किया गया, फिर भी 250 लोग बिना सीट बेल्ट और 100 लोग हेडफोन लगाकर सड़क पर चलते मिले।
आंकड़ों के मुताबिक, एक साल में तीन हजार लोग बिना सीट बेल्ट लगाए वाहन चलाते हुए पाए गए। इसके अलावा 1,200 लोग कान में हेडफोन लगाकर सड़क पर चलते मिले। यातायात विभाग और संबंधित एजेंसियों द्वारा स्कूलों, कॉलेजों, चौराहों और सार्वजनिक स्थानों पर जागरूकता कार्यक्रम, नुक्कड़ नाटक और प्रचार सामग्री के माध्यम से लोगों से नियमों का पालन करने की अपील की गई, लेकिन इसका व्यापक असर लोगों पर नहीं हुआ।
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यहां तक कह लें कि उन्हें जान की भी परवाह नहीं। फिलहाल दिए गए आंकड़े यह साफ संकेत देते हैं कि बनारस में सड़क सुरक्षा को लेकर अभी और गंभीर प्रयासों की जरूरत है, वरना जागरूकता के बावजूद हादसों का खतरा बना रहेगा।