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Traffic Rules: 30 दिन में 2800 लोगों को समझाया, 350 ने तोड़े नियम; ईयरफोन लगाकर वाहन चलाते मिले 100 लोग

Fri, 16 Jan 2026 03:00 PM IST
प्रगति चंद अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

वाराणसी जिले में 30 दिनों में 2800 लोगों को यातायात पुलिसकर्मियों ने  समझाया। इस दौरान 350 लोगों ने नियम तोड़े। इनमें 250 लोग बिना सीट बेल्ट लगाए पकड़े गए। वहीं 100 लोग ईयरफोन लगाकर वाहन चलाते मिले। 
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Traffic Police - फोटो : AdobeStock
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विस्तार
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न जान की परवाह, न यातायात नियमों का डर। एक साल में 34 हजार लोगों को यातायात नियमों का पाठ पढ़ाया गया। औसतन हर महीने 2,800 लोगों तक पुलिस पहुंची, फिर भी 350 लोगों ने नियमों को तोड़ा। सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूक किए जाने के बाद भी बड़ी संख्या में लोग नियमों की अनदेखी करते पाए गए। हर महीने औसतन करीब 2,800 से अधिक लोगों को जागरूक किया गया, फिर भी 250 लोग बिना सीट बेल्ट और 100 लोग हेडफोन लगाकर सड़क पर चलते मिले।

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आंकड़ों के मुताबिक, एक साल में तीन हजार लोग बिना सीट बेल्ट लगाए वाहन चलाते हुए पाए गए। इसके अलावा 1,200 लोग कान में हेडफोन लगाकर सड़क पर चलते मिले। यातायात विभाग और संबंधित एजेंसियों द्वारा स्कूलों, कॉलेजों, चौराहों और सार्वजनिक स्थानों पर जागरूकता कार्यक्रम, नुक्कड़ नाटक और प्रचार सामग्री के माध्यम से लोगों से नियमों का पालन करने की अपील की गई, लेकिन इसका व्यापक असर लोगों पर नहीं हुआ। 

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यहां तक कह लें कि उन्हें जान की भी परवाह नहीं। फिलहाल दिए गए आंकड़े यह साफ संकेत देते हैं कि बनारस में सड़क सुरक्षा को लेकर अभी और गंभीर प्रयासों की जरूरत है, वरना जागरूकता के बावजूद हादसों का खतरा बना रहेगा।

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पुलिस को देख उतार देते हैं ईयरफोन

सड़क पर चलते समय नियम सबको याद होते हैं, लेकिन अमल पुलिस को देखकर ही किया जाता है। हेलमेट सिर पर नहीं, हैंडल पर टंगा रहता है, ईयरफोन कानों में लगे होते हैं और पुलिस की मौजूदगी दिखते ही सीट बेल्ट खिंच जाती है। 13 प्रमुख चौराहों पर लगी एलईडी स्क्रीनों पर नियमों का पालन करना दिखाया जाता है, पीए सिस्टम से हिदायतें दी जाती हैं। फिर भी नियम तोड़ना लोगों की आदत में शामिल है। लाल बत्ती पर रुकने की आदत नहीं है और हेलमेट सिर की जगह हाथों में लटका रहता है।
 
क्या बोले अधिकारी 
जोन के सभी टीआई को निर्देशित किया गया है कि सीट बेल्ट और ईयरफोन लगाकर चलने वालों के खिलाफ कार्रवाई करें। साथ ही ब्लैक फिल्म के खिलाफ भी अभियान जारी रखें। -अंशुमान मिश्रा, एडीसीपी यातायात
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