टीजीटी में धोखाधड़ी के मामले में तीसरे वांछित आरोपी अमन कुमार को चेतगंज पुलिस ने मंगलवार रात बलिया से गिरफ्तार किया। सॉल्वर गिरोह की मदद से अमन कुमार पर परीक्षा में अनुचित साधनों के प्रयोग का आरोप है। आरोपी बलिया के उभांव थाना क्षेत्र के एकसार पिपरौली का निवासी है। इस मामले में दो आरोपी पूर्व में गिरफ्तार हो चुके हैं। चेतगंज इंस्पेक्टर विजय कुमार शुक्ला ने बताया कि 4 जून को पीएम श्री क्वींस इंटर कॉलेज लहुराबीर के प्रधानाचार्य की शिकायत पर प्राथमिकी दर्ज की गई थी।
टीजीटी परीक्षा में मूल परीक्षार्थी के स्थान पर किसी अन्य व्यक्ति के बैठने का आरोप था। इस मामले में पहले भी दो आरोपियों को 4 जून और 11 जून को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। धोखाधड़ी के मामले में अमन कुमार का भी नाम सामने आया। पूछताछ में अमन ने स्वीकारा कि सॉल्वर गैंग की मदद ली थी। फर्जी सॉल्वर बिहार सहरसा सोनबरसा थाना क्षेत्र के अमृता गढ़ निवासी अमृतराज आनंद को परीक्षार्थी बनाकर बैठाया था। छोटू कुमार को पहले गिरफ्तार किया गया। दो-दो लाख रुपये में टीजीटी का ठेका लिया था।
छह साल पुराने हत्या के मामले में एक को उम्रकैद, पांच को संदेह का लाभ
अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश संध्या श्रीवास्तव की अदालत ने फूलपुर थाना क्षेत्र के बरवां गांव में छह साल पहले जमीन के विवाद को लेकर हुई हत्या के मामले में शिव कुमार मिश्रा को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने उस पर 10 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया। वहीं, मामले में नामजद पांच अन्य अभियुक्तों महेंद्र मिश्रा, दीपक मिश्रा, धीरज मिश्रा, दशरथ मिश्रा और साक्षी मिश्रा को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। अभियोजन के अनुसार, वादी सचिन कुमार मिश्रा ने 19 मई 2020 को फूलपुर थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी।
आरोप था कि शाम छह बजे पट्टीदार महेंद्र, शिव, दीपक मिश्रा, धीरज मिश्रा, दशरथ मिश्रा और साक्षी मिश्रा लाठी, सब्बल और रॉड लेकर उनके मशीन परिसर पर पहुंचे। वहां उन्होंने सचिन के पिता अनिल , भाई पवन और मां सुनीता पर हमला कर दिया। हमले में अनिल गंभीर रूप से घायल हो गए। अस्पताल ले जाते समय उनकी मौत हो गई। अभियोजन पक्ष ने तहरीर, पंचायतनामा, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और चोट आख्या समेत अन्य साक्ष्य प्रस्तुत किए। बचाव पक्ष की ओर से मुकदमे को रंजिशन दर्ज कराने और दुर्घटनावश चोट लगने की दलील भी दी गई। साथ ही शिव की मानसिक अस्वस्थता का भी उल्लेख किया।
दहेज हत्या के 16 साल पुराने मामले में पति और सास को आठ-आठ साल की सजा
दहेज हत्या के 16 साल पुराने मामले में सत्र न्यायाधीश संजीव शुक्ला की अदालत ने पति और सास को दोषी करार देते हुए आठ-आठ साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अभियोजन के अनुसार, कैंट थाना क्षेत्र के मामले में वादी लल्लन प्रसाद ने अपनी बेटी राधिका देवी की शादी आठ दिसंबर 2004 को सूरज जायसवाल से की थी। आरोप था कि शादी के बाद से ही पति सूरज, सास किरण देवी, ससुर रघुनाथ प्रसाद और ननदें कविता व बबिता दहेज में बाइक और 50 हजार रुपये की मांग को लेकर राधिका को प्रताड़ित करते थे। संतान न होने को लेकर भी उसे ताने दिए जाते थे।
पांच सितंबर 2010 को राधिका की फंदा लगाकर मौत की सूचना पर पिता वाराणसी पहुंचे। उन्होंने बेटी के शरीर पर चोट के निशान देखकर दहेज के लिए हत्या का आरोप लगाते हुए कैंट थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। पुलिस ने विवेचना के बाद आरोपपत्र न्यायालय में दाखिल किया। अदालत ने सूरज जायसवाल और किरण देवी को आठ-आठ वर्ष के कठोर कारावास से दंडित किया। धारा 498ए और दहेज प्रतिषेध अधिनियम की धारा 4 के तहत भी एक-एक वर्ष के कारावास और एक-एक हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई गई। सजाएं साथ-साथ चलेंगी।