वाराणसी में नौ साल पुराने दुष्कर्म के मामले में विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट) कोर्ट संख्या-1 के अपर सत्र न्यायाधीश विकास श्रीवास्तव की अदालत ने रोहनिया थाना क्षेत्र निवासी हरिनाथ यादव उर्फ बाठे यादव (62) को दोषी करार देते हुए 10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई। अदालत ने दोषी पर कुल 32 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया।
अभियोजन पक्ष की ओर से विशेष लोक अभियोजक (पॉक्सो प्रथम) आदित्य नारायण सिंह ने पैरवी की। अभियोजन के अनुसार, दो अक्तूबर 2017 को दिन में करीब 11:30 बजे 12 वर्षीय बच्ची गांव में स्नान करने गई थी।
आरोप था कि इसी दौरान हरिनाथ यादव घास उठवाने के बहाने उसे बुलाकर खेत में ले गया और उसके साथ दुष्कर्म किया। बच्ची के शोर मचाने पर गांव का एक व्यक्ति मौके पर पहुंच गया। इस पर आरोपी जान से मारने की धमकी देते हुए भाग निकला। परिजनों की तहरीर पर रोहनिया थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई। पुलिस ने विवेचना पूरी कर आरोपपत्र दाखिल किया था। वर्ष 2018 में आरोपी के खिलाफ आरोप तय हुए थे।
अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर आरोपी को दोषी ठहराया।दो धाराओं में सुनाई सजा अदालत ने आईपीसी की धारा 376 और पॉक्सो एक्ट की धारा 5(एम)/6 के तहत 10 वर्ष के कठोर कारावास और 30 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। वहीं, आईपीसी की धारा 506 के तहत दो वर्ष का कठोर कारावास और दो हजार रुपये अर्थदंड लगाया।
अर्थदंड जमा नहीं करने पर अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। दोनों धाराओं में सुनाई गई सजाएं साथ-साथ चलेंगी। अदालत ने अर्थदंड के रूप में जमा होने वाली पूरी धनराशि पीड़िता को प्रतिकर के रूप में देने का आदेश दिया।
मारपीट के मामले में राज राजभर की जमानत अर्जी खारिज, नाबालिग के सिर में आई थीं गंभीर चोटें
चितईपुर थाना क्षेत्र में पुरानी रंजिश को लेकर एक किशोर पर जानलेवा हमला करने के मामले में आरोपी राज राजभर उर्फ हरिश्चंद्र को अदालत से राहत नहीं मिली। प्रभारी सत्र न्यायाधीश विवेकानंद विश्वकर्मा की अदालत ने बुधवार को आरोपी की प्रथम जमानत अर्जी खारिज कर दी। अदालत ने मामले की गंभीरता, घायल की चोटों और उपलब्ध साक्ष्यों को देखते हुए जमानत देने से इन्कार कर दिया।
अभियोजन के अनुसार, नौ अक्तूबर 2026 की रात करीब 12:30 बजे वादी विराज गौड़ का भाई हर्ष गौड़ सुंदरपुर स्थित इंजीनियर चाय वाले की दुकान के पास मौजूद था। आरोप है कि इसी दौरान पुरानी रंजिश को लेकर राज राजभर और अन्य ने उसे घेर लिया। गाली-गलौज करते हुए लाठी-डंडे और रॉड से हमला कर दिया। हमलावर जान से मारने की धमकी देते हुए मौके से भाग निकले।
बचाव पक्ष की ओर से दलील दी गई कि आरोपी निर्दोष है और घटना के समय मौके पर मौजूद नहीं था। घायल को आई चोटें सामान्य प्रकृति की हैं। वहीं, अभियोजन पक्ष ने जमानत का विरोध किया। अदालत ने मेडिकल रिपोर्ट और विवेचना के दौरान सामने आए साक्ष्यों का अवलोकन किया। मेडिकल रिपोर्ट में घायल के सिर पर कई चोटें, बाएं कंधे में सूजन और दाहिने हाथ की तर्जनी अंगुली में फ्रैक्चर का उल्लेख मिला।
कंधे की हड्डी में भी फ्रैक्चर की आशंका जताई गई थी। अदालत ने पेनड्राइव में उपलब्ध तीन वीडियो का भी संज्ञान लिया। इनमें घायल के सिर से काफी खून बहता दिखाई देने का उल्लेख आदेश में किया गया है। अदालत ने घायल की जन्मतिथि के आधार पर उसकी उम्र लगभग 16 वर्ष होने का भी उल्लेख किया। इन परिस्थितियों को देखते हुए राज राजभर उर्फ हरिश्चंद्र की जमानत अर्जी खारिज कर दी।