केंद्रीय जल संसाधन मंत्री नितिन गडकरी ने सोमवार को कहा कि नवंबर में इलाहाबाद से वाराणसी के बीच वाटर ट्रांसपोर्ट की सुविधा शुरू होगी। इसके लिए रशियन कंपनी के साथ अनुबंध हो चुका है। कंपनी के साथ संयुक्त उपक्रम के रूप में 40 से 50 यात्री क्षमता वाली एयरबोट विकसित की जा रही है। यह एयरबोट हवा में उड़ने के साथ ही पानी पर भी चल सकेगी। नवंबर में इस सुविधा की शुरुआत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ व उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य से कराने की योजना है।
नमामि गंगे योजना के अंतर्गत जारी कामों की समीक्षा बैठक के बाद पत्रकार वार्ता में केंद्रीय मंत्री ने बताया कि सोमवार को प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समक्ष इलाहाबाद से लेकर वाराणसी तक इनलैंड वॉटरवेज परियोजना का प्रजेंटेशन किया गया है। इसके अंतर्गत उन्हें वाराणसी से हल्दिया तक 1680 किलोमीटर लंबे वॉटर इनलैंड वॉटरवेज रूट की जानकारी दी गई।
इस रूट पर वाराणसी, गाजीपुर, साहिबगंज और हल्दिया में मल्टीमॉडल हब बनाए जाएंगे। इन हब पर राजमार्ग, रेलवे और वॉटर ट्रांसपोर्ट की सुविधा होगी। अक्तूबर अंत तक वाराणसी में एक हब बनाने का काम शुरू कर दिया जाएगा। इस रूट पर 1700 करोड़ रुपये खर्च कर ड्रेजिंग कराई जा रही है। इसमें 60 रीवर पोर्ट बना रहे हैं। इसके बाद यूपी से बांग्लादेश तक माल का आवागमन किया जा सकेगा।
पटना से हल्दिया तक रीवर ट्रैफिक सिस्टम विकसित कर दिया गया है। इस सिस्टम के जरिए इस रूट पर चलने वाले सभी मालवाहक जहाजों की निगरानी की जा सकेगी। दो माह में यह सिस्टम वाराणसी में भी शुरू हो जाएगा।
गडकरी ने बताया कि प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य से वॉटरवेज रूट को इलाहाबाद तक लाने की मांग की थी। उनकी मांग पर 225 किलोमीटर लंबे वाराणसी-इलाहाबाद रूट पर इस दिशा में काम शुरू किया गया है। सितंबर तक चार ड्रेजर इलाहाबाद से वाराणसी तक ड्रेजिंग शुरू कर देंगे। नवंबर में यह काम पूरा हो जाएगा। इसके बाद इस रूट पर 500-500 टन क्षमता वाले दो मालवाहक शिप का संचालन शुरू किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि इलाहाबाद में चार रीवर पोर्ट बनाए जा रहे हैं। इनके लिए पांच एकड़ जमीन सोमवार को तय हुई है। इनके जरिए पानी पर चलने और हवा में उड़ सकने वाले सी प्लेन चलाने पर काम चल रहा है। इसके लिए नागरिक उड्डयन मंत्रालय के साथ बैठककर नियम तय कर दिए गए हैं।
बीते दिनों मुंबई में प्रायोगिक तौर पर 12 सीटर सीप्लेन चलाया भी गया। इन सीप्लेन का यदि निजी कंपनियां संचालन करती हैं तो हम इन्हें अनुमति प्रदान करने के लिए तैयार हैं। हमारी कोशिश है कि कुंभ के समय यह एयर सर्विस एमरजेंसी के रूप में काम करे।