काशी के लिए संकटमोचन संगीत समारोह के मायने क्या हैं, इस सुरमयी मंच की सीरत क्या है, नजीर बनारसी का शेर उसे बयान करता है, सोएंगे तेरी गोद में एक दिन मरके, हम दम भी जो तोड़ेंगे तेरा दम भर के, हमने तो नमाजें भी पढ़ी हैं अक्सर, गंगा तेरे पानी से वजू करके..। धर्म-मजहब की तल्खियों के बीच संकटमोचन संगीत समारोह दिलों को सुकून देने वाली शीतल हवा के मानिंद है। ऐसी हवा जो गंगा-जमुनी तहजीब की महक हर ओर बिखेर रही है।
शुरुआत में भले समारोह में गैर हिंदू कलाकारों के आने पर अघोषित प्रतिबंध जैसा था, पर भारत रत्न उस्ताद बिस्मिल्लाह खां के भांजे मुमताज खां को पहली बार यहां अपनी फनकारी प्रस्तुत करने का मौका मिला। फिर तो ये सिलसिला जो बढ़ा तो बढ़ता ही गया। देश के कई अजीम कलाकार इस मंच पर आए और अपनी फनकारी से लोगों के दिलों में गंगा-जमुनी तहजीब की रोशनी को और चमकदार बना दिया। बात यहीं नहीं थमती, पाकिस्तान के मशहूर गायक गुलाम अली भी इस मंच के चमकते सितारे बने, वो भी एक बार नहीं, दो-दो बार।
पहली दफा आए तो विरोध का सामना भी करना पड़ा। पर, यह तो खुद गुलाम अली भी जानते थे कि विरोध हो सकता है, आंखें तरेरी जाएंगी। फिर भी वो आए। धर्म से ऊपर मौसिकी को रखने वालों ने भी विरोध करने वालों का मुंहतोड़ जवाब दिया। इसके बाद तो लगातार दूसरे साल भी गुलाम अली खुद को हनुमत दरबार में आने से नहीं रोक सके। उनके बाद तो सारंगी वादक कमाल साबरी, सितार वादक उस्ताद निशात खां, उस्ताद मोइनुद्दीन खां जैसे दिग्गज कलाकारों ने इस हनुमत दरबार के पांव पखारे।
सीरियल बम ब्लास्ट के बाद हुई थी शुरुआत
सात मार्च 2006 में जब शहर में सीरियल ब्लास्ट हुए, उस वक्त काशी की कौमी यकजहती की मिसाल पेश करते हुए प्रो. वीरभद्र मिश्र ने संगीत समारोह में मुस्लिम कलाकारों के प्रवेश का ऐलान कर दिया। उस साल भारत रत्न उस्ताद बिस्मिल्लाह खान के भांजे मुमताज खां ने पहली बार संकट मोचन संगीत समारोह में हाजिरी लगाई। महंत प्रो. विश्वंभर नाथ मिश्र बताते हैं कि संगीत समारोह में मुस्लिम कलाकारों की शुरुआत करने वाले मुमताज खां थे। यूं कह सकते हैं कि वो ओपनिंग बैट्समैन थे। यूं तो समारोह में शिरकत करने की उस्ताद बिस्मिल्लाह खां की भी बड़ी तमन्ना थी, लेकिन उन्हें ये मौका नहीं मिल सका। 2014 में जब से रावी नदी के फनकार गुलाम अली ने हनुमत लला के दरबार में हाजिरी लगाई तब से इस समारोह को और विस्तार मिल गया।
शताब्दी वर्ष में आए सबसे ज्यादा 11 मुस्लिम कलाकार
संकट मोचन संगीत समारोह अपना सौ वर्ष पूरे कर चुका है । ये शताब्दी वर्ष इस लिहाज से भी खास बन गया कि इस बार सबसे ज्यादा मुस्लिम कलाकार यहां हाजिरी लगाने पहुंचे हैं। इस शताब्दी वर्ष में पहले दिन उस्ताद मोइनुद्दीन खान ने अपनी सारंगी की धुन छेड़ी तो तबले पर उनका साथ दिया उस्ताद अकरम खान ने। दूसरे दिन अपनी पूरी मौसिकी और रुमानियत से तलत अजीज ने अपनी गजलों की माला हनुमत दरबार में अर्पित की। अरमान खान, बिलाल खान, उस्ताद राशिद खान, उस्ताद मुराद अली, शाकिर खान और शमीउल्लाह खान जैसे दिग्गज कलाकार अपनी प्रस्तुति दे चुके हैं। अंतिम प्रस्तुति उस्ताद शाहिद परवेज खान और बॉलीवुड गायक जावेद अली की होगी।