वाराणसी शहर के बीचोंबीच गोदौलिया के पास है गिरजाघर चौराहा। इसी नाम से इस इलाके को भी जाना जाता है। यहां पर प्रभु यीशु के शिष्य सेंट थॉमस ने आराधना की थी। वह मद्रास से चलकर काशी आए थे। बाद में यहां गिरजाघर की स्थापना की गई और उसका नाम सेंट थॉमस चर्च रखा गया।
सैकड़ों साल पहले प्रभु यीशु के 12 शिष्यों में एक सेंट थॉमस भारत यात्रा के दौरान मद्रास से चलकर काशी पहुंचे थे। यहां उन्होंने गिरजाघर इलाके में प्रवास किया था, जहां उस वक्त जंगल हुआ करता था। प्रवास के दौरान वह क्रूस लगाकर आराधना करते थे।
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यहीं पर उन्होंने अपना यात्रा वृत्तांत भी लिखा था। बाद में वह मद्रास लौट गए और वहीं रह गए। बाद में ईस्ट इंडिया कंपनी के एक सिपाही जॉन थोमर ने सेंट थॉमस के यात्रा वृत्तांत को पढ़ा और यहां आकर उस जगह की खोज की, जहां सेंट थॉमस ने प्रवास के दौरान प्रभु यीशु की आराधना की थी।
फिर यहां चर्च का निर्माण कराया और उसे सेंट थॉमस चर्च नाम दिया। अब यह चर्च सीएनआई द्वारा संचालित होता है। क्रिसमस के समय यहां भव्य सजावट की जाती है। पादरी न्यूटन स्टीवन के अनुसार यह काशी का ऐतिहासिक गिरजाघर है।