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वाराणसी : काशी विद्यापीठ के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. अर्जुन तिवारी का निधन

Fri, 23 Apr 2021 11:44 PM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी

सार

निधन की सूचना पर सभी वर्गों ने जताया शोक, दी गई श्रद्धांजलि
श्री प्रकाश शुक्ल बोले, भोजपुरी आलोचना के रामचंद्र शुक्ल थे प्रो. अर्जुन तिवारी
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प्रो. अर्जुन तिवारी । फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. अर्जुन तिवारी (82) का शुक्रवार को निधन हो गया। निधन की सूचना मिलते ही विश्वविद्यालय परिवार व उनके शुभचिंतकों में शोक की लहर दौड़ गई।

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शुक्रवार को निधन की सूचना पर रिश्तेदार और परिचितों ने आवास पर पहुंचकर शोक जताया। परिजनों ने बताया कि प्रो. तिवारी की तबीयत तीन-चार दिन से खराब थी। दोपहर बाद अचानक उन्होंने असहज महसूस किया और थोड़ी देर बाद उनका निधन हो गया। हरिश्चंद्र घाट पर उनका अंतिम संस्कार हुआ। मुखाग्नि उनके छोटे पुत्र विमलेश तिवारी ने दी।

पत्रकारिता विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. अनिल कुमार उपाध्याय ने बताया कि अभी कुछ हफ्ते पहले ही उनकी पत्नी का बीमारी के कारण निधन हो गया था, तब तिवारी जी ने दु:खी मन से मुझसे कहा कि अब मैं लिखना छोड़  दूंगा। डॉ. अर्जुन तिवारी 1996 से लेकर 2001 तक पत्रकारिता विभाग से जुड़े रहे।  पुस्तक इस दिशा में एक मानक है।

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डॉ. प्रभा शंकर मिश्र ने बताया कि डॉ अर्जुन तिवारी ने दो दर्जन से अधिक पुस्तकों का लेखन किया। भोजपुरी के क्षेत्र में भी डॉ. तिवारी ने बहुत कार्य किया। भोजपुरी, अंग्रेजी और हिंदी शब्द कोश भी तैयार किया। वह हिंदी  पत्रकारिता के ऋषि थे। शोक प्रकट करने वालो में डॉ. राजकुमार सिंह, डॉ. विनोद सिंह, डॉ. मनोहर लाल, डॉ. रूद्रानंद, डॉ. सुमित पांडेय समेत कई संस्थाओं के लोग शामिल रहे। 

बीएचयू के भोजपुरी अध्ययन केंद्र के प्रो. श्री प्रकाश शुक्ला ने कहा कि भोजुपरी साहित्य में आलोचना को सार्थक पहचान देने वाले हिंदी पत्रकारिता के मूर्धन्य हस्ताक्षर प्रो. अर्जुन तिवारी का निधन भोजपुरी भाषा व साहित्य के लिए अपूरणीय क्षति है। उन्हें भोजपुरी आलोचना का रामचंद्र शुक्ल कहा जाता था। विगत वर्षों में उन्होंने भोजपुरी साहित्य का शानदार आलोचनात्मक मूल्यांकन किया था। भोजपुरी साहित्य के इतिहास नामक
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