डॉ. प्रभा शंकर मिश्र ने बताया कि डॉ अर्जुन तिवारी ने दो दर्जन से अधिक पुस्तकों का लेखन किया। भोजपुरी के क्षेत्र में भी डॉ. तिवारी ने बहुत कार्य किया। भोजपुरी, अंग्रेजी और हिंदी शब्द कोश भी तैयार किया। वह हिंदी पत्रकारिता के ऋषि थे। शोक प्रकट करने वालो में डॉ. राजकुमार सिंह, डॉ. विनोद सिंह, डॉ. मनोहर लाल, डॉ. रूद्रानंद, डॉ. सुमित पांडेय समेत कई संस्थाओं के लोग शामिल रहे।
बीएचयू के भोजपुरी अध्ययन केंद्र के प्रो. श्री प्रकाश शुक्ला ने कहा कि भोजुपरी साहित्य में आलोचना को सार्थक पहचान देने वाले हिंदी पत्रकारिता के मूर्धन्य हस्ताक्षर प्रो. अर्जुन तिवारी का निधन भोजपुरी भाषा व साहित्य के लिए अपूरणीय क्षति है। उन्हें भोजपुरी आलोचना का रामचंद्र शुक्ल कहा जाता था। विगत वर्षों में उन्होंने भोजपुरी साहित्य का शानदार आलोचनात्मक मूल्यांकन किया था। भोजपुरी साहित्य के इतिहास नामक