प्रदूषण की निगरानी के लिए स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत शहर में करीब 50 एंबिएंट एयर मॉनिटरिंग उपकरण लगाए गए हैं। इनसे पीएम-2.5 और पीएम-10 समेत प्रदूषण के स्तर की रियल टाइम निगरानी का दावा है। इन सेंसर के जरिये प्रदूषण वाले हॉटस्पॉट की पहचान कर कार्रवाई की जानी है। इसके बावजूद रैंकिंग में लगातार गिरावट ने इन इंतजामों के असर पर सवाल खड़े किए हैं।
नगर निगम और पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार शहर में लगातार चल रहे निर्माण कार्य, सड़कों पर उड़ती धूल और बढ़ते ट्रैफिक का दबाव हवा की गुणवत्ता सुधारने में बड़ी चुनौती बना हुआ है। अब चुनौती केवल नए उपकरण और अभियान शुरू करने की नहीं, बल्कि 40 करोड़ के वायु प्रदूषण नियंत्रण बजट का जमीन पर कितना असर हुआ, इसे मापने की है।
लगातार गिर रही रैकिंग
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में 10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों की श्रेणी में वाराणसी का इस साल का प्रदर्शन पिछले तीन वर्षों में सबसे खराब रहा है। वर्ष 2023 में वाराणसी 191 अंक के साथ देश में तीसरे स्थान पर था और उसे नेशनल क्लीन एयर सिटी का पुरस्कार भी मिला था। 2024 में 176.5 अंक के साथ नौवां और 2025 में 184 अंक के साथ 11वां स्थान मिला। अब 2026 में अंक घटकर 150 रह गए और रैंकिंग 34वें स्थान पर पहुंच गई। इसके उलट प्रदेश के कई शहरों ने बेहतर प्रदर्शन किया है। लखनऊ 198 अंकों के साथ देश में पहले, आगरा चौथे, गाजियाबाद नौवें, कानपुर 11वें, प्रयागराज 13वें और मेरठ 22वें स्थान पर रहा।