अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए अगले 10 दिन में जिले के पुलिस महकमे में नई बीट व्यवस्था लागू की जाएगी। क्षेत्रफल और जनसंख्या को देखते हुए अब जिले के सभी 25 थानों में 12 से 15 बीट आरक्षी तैनात किए जाएंगे।
बीट आरक्षी अपने-अपने आवंटित क्षेत्र में न सिर्फ हर व्यक्ति के बारे में पूरी जानकारी रखेंगे, बल्कि जरूरत पड़ने पर लॉ एंड आर्डर की ड्यूटी में जाएंगे। इसके अलावा किसी अन्य काम में उन्हें नहीं लगाया जाएगा। नई बीट व्यवस्था के लिए 300 सिपाहियोें को चिह्नित किया गया है।
ब्रिटिश काल में जब पुलिस थाने अस्तित्व में आए थे ,तभी से आपराधिक प्रवृत्ति के लोगों की निगरानी और आमजन से पुलिस के समन्वय के लिए बीट व्यवस्था प्रचलन में है। मगर मौजूदा समय में बीट आरक्षी बैंक चेकिंग, फैंटम, पहरा, पिकेट आदि-आदि प्रकार की ड्यूटियों में ही व्यस्त रह जाते हैं और अपने क्षेत्र पर ध्यान ही नहीं देते।
चौक थाने के समीप ठठेरी बाजार मोड़ स्थित संजय अग्रवाल की सराफा दूकान में आठ अप्रैल को दिनदहाड़े डकैती पड़ी थी। एसएसपी नितिन तिवारी ने बताया कि चौक डकैती की जांच-पड़ताल में सामने आया कि कमजोर बीट सिस्टम भी इस घटना का अहम कारण था।
इसलिए नए सिरे से बीट व्यवस्था का खाका तैयार किया गया है। चिह्नित 300 आरक्षियों के साथ जल्द ही बैठक कर नई व्यवस्था के बारे में उन्हें पॉवर प्वाइंट प्रजेंटेशन के माध्यम से समझाने के बाद नए बीट सिस्टम को लागू कर दिया जाएगा।
बीट आरक्षियों की यह होगी जिम्मेदारी
- पासपोर्ट वेरीफिकेशन, चरित्र प्रमाण पत्र की रिपोर्ट, समन तामील सहित बीट से जुड़े काम
- क्षेत्र के बुजुर्गों और मानिंद लोगों के संपर्क में रह कर फोन पर आवश्यकतानुसार मौके पर पहुंचना
- अपराधियों के बारे में पूरी जानकारी रखना, उनकी आवाजाही और उनसे जुड़े लोगों की निगरानी
- किरायेदारोें का सत्यापन और सभी परिवारों का पूरा ब्यौरा नाम, पता और मोबाइल नंबर के साथ रजिस्टर में दर्ज करना
- क्षेत्र के बैंक, पेट्रोल पंप, स्कूल-कॉलेज, अस्पताल, डाकघर और लाइसेेंसी असलहा रखने वालों की पूरी जानकारी
- क्षेत्र की सभी चाय, पान और सब्जी की दूकान पर बीट आरक्षी का विजिटिंग कार्ड मौजूद रहना