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Cough Syrup Case: कफ सिरप बांग्लादेश भेज कमाया 10 गुना मुनाफा, शुभम के करीबी पांच आरोपी गिरफ्तार

Mon, 29 Dec 2025 05:22 PM IST
प्रगति चंद अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

Varanasi News: वाराणसी में रोहनिया और सारनाथ थाने की पुलिस को बड़ी सफलता मिली। कोडीनयुक्त कफ सिरप की अवैध खरीद-बिक्री मामले में पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया। 
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पुलिस के गिरफ्त में आरपी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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कोडीनयुक्त कफ सिरप की अवैध खरीद-बिक्री मामले में रविवार को रोहनिया पुलिस ने स्वप्निल केशरी, दिनेश यादव, आशीष यादव और सारनाथ पुलिस ने विष्णु पांडेय, लोकेश अग्रवाल को गिरफ्तार किया। आरोपियों के कब्जे से कूटरचित फर्मों के दस्तावेज, पासबुक, चेक बुक समेत अन्य प्रपत्र बरामद किए गए। 

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पूछताछ में आरोपियों ने पुलिस को बताया कि कफ सिरप बांग्लादेश भेजा गया। इससे दस गुना ज्यादा मुनाफा हुआ है। सब मुख्य आरोपी व शैली ट्रेडर्स के प्रोपराइटर भोला जायसवाल, उसके बेटे शुभम जायसवाल करीबी हैं। कमिश्नरेट की पुलिस ने अब तक 11 आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

अपर पुलिस उपायुक्त नीतू कात्यायन ने रविवार को पुलिस लाइन सभागार में पत्रकारों से बात की और आरोपियों के गिरफ्तारी की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सारनाथ थाने की पुलिस ने परशुरामपुर तिसरिया निवासी विष्णु कुमार पांडेय और महमूरगंज मोहिनी कुंज निवासी लोकेश अग्रवाल को पकड़ा है। 
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पीडी फर्मा के प्रोपराइटर विष्णु पांडेय, लोकेश फार्मास्युटिकल के प्रोपराइटर लोकेश अग्रवाल ने शुभम जायसवाल के साथ मिलकर कफ सिरफ की गलत तरीके से खरीद-बिक्री की है। इसमें सप्तसागर के शिल्पी फार्मा के प्रोपराइटर प्रतीक गुजराती का नाम भी शामिल है। प्रतीक ने योजनाबद्ध तरीके से कूटरटित दस्तावेज तैयार कराए और कोडीनयुक्त सीरप की बिक्री की।

रोहनिया थाने की पुलिस ने चंदौली के मुगलसराय कोतवाली क्षेत्र के राममंदिर ईस्टर्न बाजार निवासी स्वप्निल केशरी, वाराणसी में मैदागिन सप्तसागर निवासी दिनेश कुमार यादव और जैतपुरा थाना क्षेत्र के ईश्वरगंगी निवासी आशीष यादव को गिरफ्तार किया है।

एसीपी सारनाथ विदुष सक्सेना ने बताया कि आरोपियों का उद्देश्य बांग्लादेश व अंतरराज्यीय जनपदों में शराब के विकल्प के रूप में कोडीनयुक्त सीरप की तस्करी कर 10 गुना मुनाफा कमाना रहा है। इस अपराध को अंजाम देने के लिए एक सुव्यवस्थित नेटवर्क का उपयोग किया गया। 

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आरोपियों ने पीडी फार्मा और गनेशू फर्म जैसी कई कंपनियां खोलीं और डमी संचालक विष्णु कुमार पांडेय जैसे लोगों को केवल दस्तावेजों (आधार, पैन, बैंक खातों, फर्जी दस्तावेज आदि) का उपयोग कर मालिक बनाया गया लेकिन असली मालिक लोकेश अग्रवाल व शुभम जायसवाल थे। चेकबुक, एटीएम, लॉगिन आईडी और डिजिटल हस्ताक्षर अपने पास रखते थे। डमी संचालक को इन सब का लाभांश दो लाख प्रति वर्ष मिलता था। 

कोडीनयुक्त कफ सिरप शुरुआत में स्थानीय स्टॉकिस्टों व अपनी फर्जी फर्मों से क्रय किया। बाद में शुभम जायसवाल ने रांची में शैली ट्रेडर्स नाम से फर्म खोलकर एबॉट से सुपर स्टॉकिस्ट बनकर सीधा माल उठाना शुरू कर दिया। माल की बिलिंग जानबूझकर 50,000 से कम की जाती थी ताकि ई-वे बिल जनरेट न करना पड़े। इससे माल के परिवहन का कोई सरकारी डिजिटल रिकॉर्ड नहीं बनता था।

गोल्ड में निवेश, हवाला के जरिये बनाया मुनाफा का रास्ता

सारनाथ थानाध्यक्ष पंकज त्रिपाठी ने बताया कि यह सिंडिकेट न केवल दवाओं की तस्करी कर रहा था बल्कि मुनाफे को वापस लाने के लिए एक जटिल हवाला और गोल्ड नेटवर्क का उपयोग कर रहा था। इसमें नशीली दवा को नीला और सोने को पीला सांकेतिक करते हुए नीले से पीला कोड वर्ड इजाद किया गया। कफ सीरप को होलसेल रेट 100 प्रति शीशी में खरीद कर बांग्लादेश व अन्य राज्यों में शीशियों की तस्करी करते हुए 700 प्रति शीशी पर बेची जाती थी। मुनाफा सोने के रूप में तस्करी कर पश्चिम बंगाल आता था। सोने को करेंसी (रुपये) में कन्वर्ट कर हवाला ऑपरेटर के माध्यम से कोड 10 रुपये या 100 रुपये ,500 रुपये की गड्डी में 100 की नोट के कोड नंबर से मैच करवा कर रुपये को एडजस्ट किया जाता था। जांच के क्रम में पाया गया कि पीडी फार्मा के लोकेश ने प्रतीक गुजराती के माध्यम से करीब 6 करोड़ से ज्यादा का कैश डिपॉजिट कर काले धन को अन्य फर्जी फर्मों के माध्यम से मनी लॉन्ड्रिंग की गई।

बैंक खातों में जमा एक करोड़ रुपये फ्रीज
रोहनिया एसीपी संजीव शर्मा ने बताया कि 19 नवंबर को भदवर स्थित महेश सिंह के गोदाम पर अवैध तरीके से नशीला सिरप बरामद हुआ था। इसमें आजाद जायसवाल को गिरफ्तार किया गया था। आजाद जायसवाल ने पुलिस को बताया था कि यह माल शुभम जायसवाल का है जो कि बांग्लादेश में बेचा जाता है। इसके बाद हवाला के माध्यम से शुभम जायसवाल तक रुपये पहुंचाया जाता है। आरोपियों के बैंक खाते में जमा करीब एक करोड़ से ज्यादा रुपये फ्रीज कराए गए हैं। शुभम जायसवाल ने ये रुपये दिनेश यादव, आशीष यादव और मुगलसराय निवासी स्वप्निल के माध्यम से शेल फर्मों में जमा कराए थे। आरोपी दिनेश यादव, आशीष यादव व स्वप्निल शेल फर्म अल उकबा, सिंह मेडिकोज व एसपी फाॅर्मा खोली गई।
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पूछताछ में आरोपियों के नाम सामने आए

रोहनिया एसीपी ने बताया कि विवेचना के दौरान सिंह मेडिकोज फर्म के मकान को खोला गया था। उसके मकान मालिक व अल उकबा के प्रोपराइटर, सिंह मेडिकोज के संबंधित बैंक कर्मचारी के बयान से स्वप्निल केशरी, दिनेश कुमार यादव, आशीष यादव का नाम प्रकाश में आया। पता चला कि सिंह मेडिकोज, अल उकबा व एसपी फार्मा नाम से तीन सेल फार्म शुभम जायसवाल के निर्देशन में खोली गई थीं।

घर पर पेंट करने आए कर्मचारी के नाम पर खोल दी फर्म
रोहनिया इंस्पेक्टर राजू सिंह ने बताया कि शुभम जायसवाल के साथ मिलकर चंदौली में तीन मेडिकल फर्म खोली गई। एसपी फार्मा मुगलसराय के काली महाल में है। इसकी मालिक सबा परवीन हैं। अल उकबा मेडिकल एजेंसी का प्रोपराइटर सद्दाम हुसैन जो मेरे यहां पेंटिंग का काम करने आया था फिर उसके नाम से फर्म खोली गई। यह फर्म संजय केशरी के मकान में खोली गई थी। आरोपी स्वप्निल केशरी ने पुलिस को बताया कि शुभम से सप्तसागर दवा मंडी में जान पहचान हुई थी। दिनेश कुमार यादव के दुकान के सामने शुभम जायसवाल की दवा की दुकान है। दिनेश कुमार यादव और आशीष यादव ने रुपये कमाने का तरीका बताया और शुभम जायसवाल से कई बार मिलवाया। शुभम जायसवाल ने हम लोगों को मेडिकल फार्मा एजेंसी की रजिस्टर्ड दुकान खोलने का तरीका बताया।
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