बनारस के यूपी कॉलेज के बीएससी स्नातक और इंटरमीडिएट के आठ छात्रों ने गर्लफ्रेंड के शौक पूरे करने, महंगे होटलों में ठहरने के अलावा ब्रांडेड कपड़े व जूते खरीदने और मौजमस्ती के लिए शहर के अलग-अलग इलाकों से 110 बाइक चुराई। इसका खुलासा करते हुए क्राइम ब्रांच ने चार छात्रों और चोरी की दो बुलेट सहित 19 बाइक बरामद किया है।
गिरफ्तार आरोपियों की शिनाख्त आशापुर के बीएससी कृषि प्रथम वर्ष के सुजीत सिंह और इंटरमीडिएट के सैय्यदराजा के करन सिंह उर्फ बीरू, गाजीपुर के करंडा क्षेत्र के खुलासपुर के अखिलेश यादव व जौनपुर के जलालपुर क्षेत्र के जगापुर के शिवम सिंह के तौर पर हुई। वांछित चार अन्य आरोपियों की तलाश में पुलिस की दो टीम लगाई गई है।
एसएसपी आनंद कुलकर्णी ने मंगलवार को बताया कि शहर में बाइक चोरी की घटनाओं में तेजी आई हुई थी। एसपी क्राइम ज्ञानेंद्र नाथ प्रसाद को घटनाओं के खुलासे के लिए कहा गया। क्राइम ब्रांच प्रभारी विक्रम सिंह ने चोरी वाले घटनास्थलों के सीसी कैमरे की फुटेज खंगालनी शुरू की तो सामने आया कि 18 से 25 वर्ष की आयु के बीच के बदमाश बाइक चुरा रहे हैं।
मुखबिरों की मदद से उनकी तस्दीक कराई गई तो सभी यूपी कॉलेज के छात्र निकले। क्राइम ब्रांच प्रभारी ने इंस्पेक्टर शिवपुर विजय बहादुर सिंह की मदद से भवानीपुर मोड़ के पास से चार आरोपियों को गिरफ्तार कर उनकी निशानदेही पर 19 बाइक बरामद की।
सिक्योरिटी गार्ड को मारी थी गोली
बरामद बाइक
- फोटो : amar ujala
बीते मई के आखिरी हफ्ते में यूपी कॉलेज के सिक्योरिटी गार्ड विनोद सिंह को गोली मारी गई थी। क्राइम ब्रांच प्रभारी विक्रम सिंह ने बताया कि बाइक चोरी के पैसे से अखिलेश यादव ने मुंगेर से दो पिस्टल खरीदी थी।
इसके बाद शराब के नशे में धुत होकर पिस्टल की टेस्टिंग के लिए अखिलेश, अजय सिंह और सर्वेश सिंह ने अकारण ही विनोद को गोली मार दी थी। अजय और सर्वेश की तलाश की जा रही है।
कॉलेज का आई कार्ड आता था बहुत काम
बाइक
- फोटो : amar ujala
गिरफ्तार आरोपी अच्छे घरों से ताल्लुक रखते हैं। पूछताछ में चारों ने बताया कि बाइक चुराने के दौरान यदि कहीं पकड़े जाते थे तो कॉलेज का कार्ड दिखाकर सब कुछ मैनेज कर लेते थे। बात बढ़ने पर दोस्तों को बुलाकर हंगामा शुरू कर देते थे। गैंग का सरगना शिवम है और वो ही वारदात के स्थान को बताता था।
कचहरी, भोजूबीर, अर्दली बाजार, गिलट बाजार, नदेसर और पांडेयपुर से सारी बाइक चुराई गई थी। सारी बाइक बिहार में बेची गई और दोस्तों पर भी पर्याप्त रुपया खर्च किया जाता था। सभी घर में तो सामान्य तरीके से ही रहते थे लेकिन दोस्तों के पास आते ही खुद से खरीदे गए कपड़े और जूते पहनते थे।