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निकाय चुनावः सरकारी लापरवाही से ठंडा पड़ा वोट डालने का जोश, दिन भर होती रही किचकिच

Mon, 27 Nov 2017 01:20 AM IST
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
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निकाय चुनाव की सूची से हजारों की संख्या में नाम हुए गायब - फोटो : अमर उजाला
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चुनाव आयोग का शत प्रतिशत मतदान का लक्ष्य पूरा नहीं हो सका। इसके लिए सरकारी विभाग की लापरवाही पूरी तरह से जिम्मेदार है। इस लापरवाही के कारण कई लोगों का वोट डालने का जोश ठंडा हो गया। रविवार को निकाय चुनाव में मतदान के दौरान शहर के कई वार्डों पर मतदाता सूची से नाम कटने के कारण काफी लोग मतदान नहीं कर सके।
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मतदाता सूची में गड़बड़ी की स्थिति यह थी कि जिंदा लोगों के नाम गायब थे और मृतकों का नाम सूची में था।  मतदाता सूची में गड़बड़ी की शिकायत ज्यादातर जगहों पर मिली। घर के कुछ सदस्यों का नाम सूची में थे तो कुछ के गायब थे।

कहीं-कहीं पूरा परिवार का नाम ही वोटर लिस्ट में नहीं था। स्थानीय लोगों का कहना था कि राज्यमंत्री का नाम सूची से हटा था तो बीएलओ को निलंबित कर दिया गया लेकिन हम लोगों का नाम कट गया है इसके लिए जिम्मेदार लोगों पर कब कार्रवाई होगी। 
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मतदाता सूची को ठीक करने की जिम्मेदारी बीएलओ को सौंपी गई थी। बीएलओ ने घरों पर जाकर सूची का सत्यापन किया था लेकिन जब बूथ पर वोटर पहुंचे तो पता चला कि सूची में उनका नाम नहीं है।

इसको लेकर वोटरों और कर्मचारियों में नोकझोंक भी हुई। केंद्रीय विद्यालय के रिटायर्ड प्राचार्य जेपी यादव और उनके पूरे परिवार का भी नाम वोटर लिस्ट से गायब था। उन्होंने बताया कि वह सुंदरपुर के गांधीनगर एक्सटेंशन में रहते हैं। विधानसभा चुनाव में मतदान किया था लेकिन निकाय चुनाव में उनका नाम ही गायब था। 
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नाम ढूंढने के लिए काटे कई मतदान केंद्रों के चक्कर

चंद्रशेखर आजाद वार्ड का वोटिंग प्रतिशत 86.36 रहा - फोटो : अमर उजाला
 सिगरा के रहने वाले निर्यातक गौरव कपूर और उनकी पत्नी का नाम वोटर लिस्ट से गायब रहा। शिवपुरवा स्थित मतदान केंद्र की सूची में नाम नहीं मिला तो वह महमूरगंज स्थित मतदान केंद्र पहुंचे पर वहां भी निराशा मिली। उन्हें पता चला कि सिगरा के कुछ वोटरों का नाम सिद्धगिरीबाग स्थित मतदान केंद्र में भी है। गौरव वहां भी गए पर खाली हाथ लौटे। बीएलओ ने बताया कि आपकी पत्नी इससे पहले वोट नहीं डालतीं थी इसलिए नाम नहीं होगा। ऐसा कई मतदाताओं के साथ हुआ। 

वाराणसी विकास समिति के अध्यक्ष एवं प्रमुख उद्यमी आरके चौधरी ने बताया कि पहली बार वह वोट डालने के अधिकार से वंचित रह गए। वोटर लिस्ट से उनका नाम नहीं था। उन्होंने बताया कि उनके परिवार का नाम भी वोटर लिस्ट से गायब था।

कहा कि हमारा संगठन काशी को विकसित करने की दिशा में लगातार काम कर रहा है। वोटर लिस्ट में नाम न होने से संगठन के लोग मर्माहत हैं। दूसरी तरफ विनय कुंज निवासी कारोबारी सुरेंद्र सोनी, राजन सेठ आदि ने भी बताया कि उनका और उनके परिवार का नाम वोटर लिस्ट से नहीं था। बूथ परिवर्तन होने से भी काफी लोगों को दिक्कतें हुई। 
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