मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सत्ता संभालते ही भ्रष्टाचार, माफिया तंत्र और लालफीताशाही के खिलाफ सख्त रुख भले ही अपनाया है, मगर अफसर मुख्यमंत्री की सोच के मुताबिक अपने काम को अंजाम नहीं दे पा रहे हैं।
जिले में चाहे मामला भू माफियाओं से जुड़ा हो... वरुणा के दोनों तट पर आलीशान होटलों के अवैध कब्जे का हो... पट्टा खत्म होने के बाद भी सरकारी जमीन पर संचालित निजी बनारस क्लब का हो... या फिर धनबल और बाहुबल से संपन्न रसूखदारों से जुड़े अन्य मामले हों, कार्रवाई की बात आती है तो पुलिस और प्रशासन के आला अधिकारी कन्नी काटने लगते हैं।
पांच महीने में भी हालात नहीं बदलने पर लोग कहने लगे हैं कि धनबल और बाहुबल वालों के लिए सब कुछ पिछली सरकार जैसा ही है।
केस - 1
भू माफिया: चिह्नित किया मगर कार्रवाई नहीं
मुख्यमंत्री की बार-बार की ताकीद के बाद जिले में 65 भू-माफिया चिह्नित किए गए। सीएम ने अपने तीनों दौरों में भू-माफिया के खिलाफ कार्रवाई की बात कही। प्रमुख सचिव राजस्व ने टॉप थ्री भू-माफिया को जेल भेजने की बात कही। मगर, भू-माफिया के खिलाफ कार्रवाई करना छोड़ पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी ठेले और खोमचों का अतिक्रमण हटाने तक ही सीमित रहे।
चौबे हत्याकांड : विधायक के नाम पर चुप्पी
आय से अधिक संपत्ति
- फोटो : सांकेतिक चित्र
केस - 2
चौबे हत्याकांड : विधायक के नाम पर चुप्पी
एमएलसी बृजेश सिंह के करीबी बसपा नेता रामबिहारी चौबे की हत्या में भाजपा विधायक सुशील सिंह का नाम आपराधिक षड्यंत्र के आरोप में जोड़ा गया। मामले में एमएलसी के करीबी रहे अजय मरदह सहित तीन की गिरफ्तारी के बाद तफ्तीश कहां तक पहुंची? इसका जवाब वादी अमरनाथ चौबे को चौबेपुर के थानेदार से लगायत महकमे के आला अधिकारी तक नहीं दे रहे हैं।
केस - 3
बनारस क्लब: पल्ला झाड़ने को तरीका बनाया
दो साल पहले पट्टा की अवधि खत्म होने के बाद भी करोड़ों की सरकारी जमीन पर द बनारस क्लब लिमिटेड का कब्जा है। क्लब के पदेन अध्यक्ष कमिश्नर और उपाध्यक्ष डीएम हैं। सरकारी जमीन पर निजी क्लब बिना पट्टे के चलने का मामला विधान परिषद में भी उठ चुका है। पूछने पर अधिकारी पुराने कागजात दिखाते हुए शासन स्तर का मामला बताते हुए चुप्पी साध लेते हैं।
केस - 4
राजघाट भगदड़: साल भर बाद सिर्फ दो गिरफ्तार
15 अक्तूबर, 2016 को पंकज बाबा के अनुयाइयों की जयगुरुदेव शाकाहार शोभायत्रा के दौरान राजघाट पुल पर भगदड़ मच गई। 25 की मौत हुई और सौ से अधिक घायल हुए, मगर साल भर होने को आया मात्र दो आरोपी गिरफ्तार हुए हैं। यही नहीं, पुलिस और प्रशासन को अनुमानित भीड़ के बारे में गलत जानकारी देने वाले अभी तक चिह्नित ही नहीं हो सके हैं।