पांडेयपुर फ्लाईओवर के नीचे सड़क का ऐसा है हाल
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कागजी घोड़े दौड़ाने में माहिर वाराणसी के प्रशासनिक अधिकारी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आगमन की सूचना के बाद शहर की खराब व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने में जुटे हैं। जबकि 19 मई को मुख्यमंत्री ने समीक्षा बैठक में सड़क, बिजली और पानी की व्यवस्था को सुधारने के लिए 15 दिन का समय दिया था। मगर, अधिकारी मुख्यमंत्री की ताकीद को उनके लखनऊ रवाना होने के साथ अधिकारी भूल गए।
यही कारण है कि शहर में जनसुविधाओं को लेकर कोई काम नहीं हुआ। सड़कों का निर्माण शुरू नहीं कराया गया। आईपीडीएस का काम अब भी लटका हुआ है और शहर में जगह जगह गड्ढे खुदे हैं। उधर, मंडलायुक्त और जिलाधिकारी भी केवल विभागों को निर्देश देकर अपने कर्तव्य की इतिश्री कर चुके हैं।
बार-बार चेतावनी तो दी गई, लेकिन लापरवाह अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं होने से विभागों के रवैए में कोई सुधार नहीं हुआ है। मुख्यमंत्री इस सप्ताह में वाराणसी आ सकते हैं, मगर उनके निर्देश का पालन अब तक नहीं किया गया है।
जिलाधिकारी योगेश्वर राम मिश्र ने कहा कि मुख्यमंत्री के दौरे में मिले निर्देश के अनुपालन में काम कराया जा रहा है। प्रत्येक शनिवार को सभी विभागों की समीक्षा की जा रही है। जल निगम और गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई का काम संतोषजनक नहीं है। सड़क, बिजली और अन्य जनसुविधाओं पर काम कराया जा रहा है।
15 दिन में शहर में नहीं हुआ कोई काम
सड़क, बिजली और पानी जैसी मूलभूत सुविधाओं के सुधार के लिए नहीं किया काम
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मुख्यमंत्री के दौरे के बाद शहर में किसी तरह का विकास कार्य नहीं कराया गया। शहर की ज्यादातर सड़कें अब भी जर्जर हालत में हैं। इसमें मंड़ुवाडीह, सिगरा, मलदहिया, लहरतारा कालोनी, छित्तुपुर सहित कई सड़कें नहीं बनी हैं।
गर्मी में बेटपरी बिजली व्यवस्था का हाल किसी से छिपा नहीं है। जबकि वाराणसी को 24 घंटे बिजली आपूर्ति का निर्देश दिया गया था। पेयजल आपूर्ति को लेकर भी प्रमुख सचिव और नोडल अधिकारी ने 23 सौ हैँडपंप का भौतिक सत्यापन का निर्देश दिया था, मगर अधिकारियों ने कोई काम नहीं किया।
परियोजनाओं पर काम कराया तेज
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आगमन की सूचना के बाद से निर्माणाधीन परियोजनाओं पर काम तेज कराया जा रहा है। जिन परियोजनाओं का मुख्यमंत्री ने स्थलीय निरीक्षण किया था, वहां तेजी से काम कराया जा रहा है, ताकि यदि मुख्यमंत्री वहां दोबारा जाएं तो प्रगति दिखाई दे।
अवैध वसूली रोकने के लिए कोई प्रयास नहीं
कानून व्यवस्था की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने अवैध वसूली की शिकायत को गंभीरता से लिया था ऐसा करने वालों को जेल भेजने की ताकीद की थी। चौराहों और तिराहों से मिल रही अवैध वसूली की शिकायतों पर ना तो किसी स्तर पर जांच की गई और ना ही कार्रवाई ही हुई है।
प्रशासन कागजों में ही तलाश रहा है भूमाफिया
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प्रदेश के मुख्यमंत्री बनने के बाद योगी आदित्यनाथ ने प्रत्येक जिले में भूमाफिया को सूचीबद्ध कर कार्रवाई का निर्देश दिया था। मगर, वाराणसी में प्रशासन के लापरवाह रवैये के चलते भूमाफिया पर कार्रवाई नहीं हुई।
पहले चरण में प्रशासन ने 10 भूमाफिया चिह्नित किए थे, मगर उन्हें न्यायालय से राहत मिल गई। अब शासन ने नए सिरे से भूमाफिया चिह्नित करने के निर्देश दिए हैं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई।
मई के अंतिम सप्ताह में प्रमुख सचिव और नोडल अधिकारी रजनीश दूबे ने वाराणसी दौरे में भूमाफिया पर कार्रवाई नहीं किए जाने पर नाराजगी जताई थी। इसके बाद जिलाधिकारी ने सभी तहसीलों से टॉप 10 भूमाफिया को चिह्नित करने का निर्देश दिया था।
10 दिन बीतने के बाद भी तहसीलों से सूची नहीं तैयार हो पाई है। जिलाधिकारी का कहना है कि इस सप्ताह तीनों तहसीलों से सूची मिल जाएगी। इसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।