मुख्यमंत्री के आदेश पर बेपरवाह अफसरशाही ने काम में हीलाहवाली करने वाली एजेंसियों पर एफआईआर दर्ज कराने की बजाय नोटिस जारी कर कागजी खानापूर्ति कर ली है।
बनारस के दीनापुर एसटीपी और शाही नाला की सफाई में हीलाहवाली पर नाराज मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को वाराणसी दौरे पर दोनों जगहों पर काम कर रही एजेंसियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने का आदेश दिया था। बावजूद दोनों एजेंसियों पर मुकदमा दर्ज नहीं होने को लेकर प्रशासनिक मशीनरी अनजान बनी है।
सबसे अहम बात यह है कि नौ अगस्त को मुख्यमंत्री फिर वाराणसी दौरे पर आ रहे हैं, मगर अफसरों में सीएम के दोबारा आगमन का भी भय नहीं है। 170 करोड़ की लागत से बन रहे 140 एमएलडी क्षमता का दीनापुर सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट को जून 2018 में शुरू होना था।
तीन बार समय सीमा बढ़ने के बाद भी अब तक यह काम पूरा नहीं हो पाया। इस एसटीपी का निर्माण कर रही वीए टेक लिमिटेड को शासन की ओर से 150 करोड़ रुपये जारी कर दिया गया है। मगर, दीनापुर एसटीपी का काम 85 फीसदी ही हुआ है।
उधर, 84 करोड़ रुपये की लागत से शहर के ओल्ड ट्रंक सीवर शाही नाले का मरम्मत श्रीराम ईपीएच लिमिटेड ने कार्य शुरू किया था। इस कार्य को छह माह पहले ही पूरा होना था। अब तक कंपनी मात्र 50 प्रतिशत ही कार्य कर पाई है। जबकि शासन ने इस कार्य के लिए अब तक 35 करोड़ रुपये से अधिक की राशि जारी किया है।
जबकि अस्सी से लेकर खिड़किया घाट तक 7.5 किमी लंबे इस नाले को साफ करने और उसकी मरम्मत करने का काम दिया गया है, लेकिन कंपनी केवल मच्छोदरी तक ही कार्य कर पाई है। पिछले दिनों इस कंपनी पर सात करोड़ रुपये का जुर्माना भी लगाया था।