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Varanasi News: महिलाओं ने 8 घंटे की मां शीतला की बसियउरा पूजा, फालसे का लगा भोग; भोर से शुरू हुई पूजा

Mon, 11 May 2026 04:12 PM IST
Aman Vishwakarma अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

Varanasi News: काशी नगरी में ज्येष्ठ कृष्ण अष्टमी पर मां बड़ी शीतला माता मंदिर में बसियउरा पूजा श्रद्धा के साथ संपन्न हुई। महिलाओं ने शीतल भोजन और मौसमी फलों का भोग लगाकर परिवार की सुख-समृद्धि व आरोग्य की कामना की। वहीं, कालभैरव समेत अष्ट भैरव मंदिरों में भी विशेष पूजन और दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी।
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माता शीतला। - फोटो : अमर उजाला
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Varanasi News: ज्येष्ठ मास कृष्ण पक्ष की अष्टमी पर काशी में मां बड़ी शीतला की बसियउरा पूजा श्रद्धा और उल्लास के साथ हुई। महिलाओं ने पूरी रात जागकर विविध पकवान तैयार किए और भोर से शुरू हुए पूजन में शामिल होकर परिवार की सुख-समृद्धि और निरोग जीवन की कामना की। 

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दशाश्वमेध घाट स्थित बड़ी शीतला माता मंदिर में सुबह चार बजे से श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने लगी। महिलाओं ने माता को गुलगुला, पूड़ी, सब्जी, हलुआ के साथ फालसा, ककड़ी, तरबूज, आम समेत मौसमी फलों का भोग लगाया। रामनगर, मिर्जापुर और आसपास के क्षेत्रों से भी श्रद्धालु दर्शन-पूजन के लिए पहुंचे। 

शीतला माता की बसिऔरा पूजा चैत्र, वैशाख, ज्येष्ठ और आषाढ़ मास की शीतलाष्टमी पर करने का विधान है। मान्यता है कि इस दिन एक दिन पहले बने शीतल भोजन का भोग लगाकर माता की आराधना करने से परिवार को रोगों से रक्षा और सुख-समृद्धि प्राप्त होती है।
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मंदिर के महंत पं. शिव प्रसाद पांडेय लिंगिया महाराज के सानिध्य में पं. अभिषेक पांडेय, अभिनाश पांडेय, कल्लू महाराज और अभय पांडेय ने माता को पंचामृत स्नान कराया। इसके बाद नवीन वस्त्र और आभूषण धारण कराकर बेला, चंपा, चमेली और जूही के फूलों से विशेष शृंगार किया गया। महंत पं. शिव प्रसाद पांडेय ने बताया कि स्कंद पुराण में माता शीतला को रोगों से रक्षा करने वाली देवी बताया गया है। 

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भैरव मंदिरों में भी हुई पूजा
ज्येष्ठ मास कृष्ण पक्ष की अष्टमी पर भैरव मंदिरों में भी दर्शन-पूजन के लिए भीड़ उमड़ी। काशी में स्थित अष्ट भैरव और अष्टदश भैरव मंदिरों में विशेष पूजन किया गया। बाबा कालभैरव, बटुक भैरव, आस भैरव, कपाल भैरव आदि मंदिरों में शृंगार और पूजन-अर्चन के लिए भक्तों की भीड़ रही। मान्यता है कि भैरव बाबा के दर्शन-पूजन एवं व्रत करने से आरोग्य सुख की प्राप्ति होती है। साथ ही अकाल मृत्यु के भय एवं अन्य कठिनाइयों का निवारण होता है।
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