गिरोह सर्वाधिक चुने गए नंबरों का विश्लेषण कर परिणामों में हेरफेर करता था, जिससे खिलाड़ियों को आर्थिक हानि होती थी और गिरोह लाभ कमाता था। ग्राहकों से संपर्क, भुगतान और नेटवर्क चलाने के लिए व्हाट्सएप समूह और अन्य मैसेजिंग एप का उपयोग होता था।
बरामद फोन के परीक्षण में सट्टेबाजी से संबंधित डिजिटल साक्ष्य मिले हैं, जिनका विस्तृत डिजिटल फोरेंसिक विश्लेषण कराया जा रहा है। कई ऐसे नंबरों को भी चिह्नित किया गया है, जिससे अहम सुराग मिल सकते हैं।
गिरोह के असली मास्टरमाइंड की भी जल्द गिरफ्तारी होगी। ऑनलाइन सट्टेबाजी से संबंधित पर्चियां, हिसाब-किताब और अन्य डिजिटल साक्ष्य भी बरामद किए गए हैं। साइबर थाना प्रभारी निरीक्षक उदयवीर सिंह ने बताया कि गिरोह के अन्य सदस्यों, वित्तीय लाभार्थियों और तकनीकी सहयोगियों की पहचान कर उनके खिलाफ भी कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। एसीपी साइबर क्राइम विनय द्विवेदी ने अपील की है कि ऑनलाइन सट्टेबाजी, जुआ और तुरंत लाभ देने वाले ऑनलाइन प्लेटफार्मों से दूर रहे।
थाना-चौकी, एसओजी तक को भनक नहीं लगी
कैंट थाना से महज 100 मीटर की दूरी और नदेसर चौकी से लगभग एक किमी से भी कम दूरी पर सद्भावना पार्क के पीछे ऑनलाइन जुआ, सटे्टबाजी चल रही थी। बावजूद पुलिस को भनक तक नहीं लग सकी। कैंट थाने के साथ ही एसओजी भी पता नहीं लगा चला कि थाने के पास गिरोह सक्रिय है। विभागीय सूत्रों के अनुसार, नदेसर के मिंट हाउस, कटिंग मेमोरियल मैदान के ठीक सामने, सदर बाजार, छावनी क्षेत्र में तारांकित एक होटल के पीछे भी ऑनलाइन लऑटरी का गिरोह संचालित है। सिर्फ पुलिस को भनक नहीं लग पा रही है। पिछले महीने भर से ऑनलाइन लाटरी चल रही है।