माफिया मुख्तार अंसारी जरायम जगत में अपनी मनमर्जी और बेखौफ तरीके से वारदात को अंजाम देने के लिए कुख्यात रहा है। इसलिए जब वह किसी आपराधिक वारदात को अंजाम देने की ठान लेता था तो अपने गुर्गों से कहता था कि हनुमान गेयर लगावत हई...।
हनुमान गेयर लगावत हई कहने से मुख्तार अंसारी का तात्पर्य यह रहता था कि अब जो कुछ हो जाए, लेकिन वारदात को अंजाम देना ही है। यह मुख्तार का इतना चर्चित सूत्र वाक्य है कि इसके बारे में गाजीपुर और मऊ के उसके कई करीबी भलीभांति वाकिफ हैं।
माफिया मुख्तार अंसारी का आपराधिक इतिहास लगभग 37 साल का है। मुख्तार अंसारी के खिलाफ वर्ष 1978 में पहली बार आपराधिक धमकी के आरोप में गाजीपुर के सैदपुर थाने में एनसीआर दर्ज की गई थी। मुख्तार की जन्मतिथि के अनुसार उस समय उसकी उम्र लगभग 15 वर्ष रही होगी।
इसके बाद लगभग आठ वर्ष तक उसका नाम किसी भी आपराधिक घटना में सामने नहीं आया। वर्ष 1986 में मुख्तार अंसारी का नाम हत्या के मामले में सामने आया और मुहम्मदाबाद थाने में उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया। इसके बाद जरायम जगत में मुख्तार ने पीछे मुड़कर नहीं देखा।
गाजीपुर के मंडी परिषद के ठेकेदार सच्चिदानंद राय हत्याकांड, अवधेश राय हत्याकांड, कपिलदेव सिंह हत्याकांड, कोयला व्यापारी नंद किशोर रूंगटा का अपहरण व हत्या, मन्ना सिंह हत्याकांड, राम सिंह मौर्य व सिपाही सतीश कुमार हत्याकांड, कृष्णानंद राय हत्याकांड और मऊ दंगे जैसे प्रदेश और देश की चर्चित घटनाओं में मुख्तार का नाम सामने आया। इनमें से कई मामलों में मुख्तार अंसारी को अदालत से राहत भी मिली। वर्तमान समय में मुख्तार अंसारी पर दर्ज मुकदमों की संख्या 61 है।
भगोड़े सिपाही से एलएमजी खरीदने की थी तैयारी
मुख्तार अंसारी वर्ष 2004 में एक भगोड़े सिपाही से सेना की चुराई गई लाइट मशीन गन यानी एलएमजी खरीदने की तैयारी में था। इसका खुलासा एसटीएफ के तत्कालीन डीएसपी शैलेंद्र सिंह ने चौबेपुर क्षेत्र में छापा मार कर किया था। प्रकरण में मुन्नर यादव और बाबूलाल यादव को गिरफ्तार कर किया था। उनके पास से एलएमजी के साथ 200 कारतूस बरामद हुए थे।
दोनों ने पूछताछ में बताया था कि मुख्तार एक करोड़ रुपये में एलएमजी खरीदने को तैयार था। इस प्रकरण में मुख्तार अंसारी के साथ ही गिरफ्तार दोनों आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था। इस घटना के बाद शैलेंद्र सिंह पर ऐसा राजनीतिक दबाव पड़ा कि उन्होंने नौकरी से इस्तीफा दे दिया।
अवधेश राय हत्याकांड में मुख्तार अंसारी को उम्रकैद
आपको बता दें कि विशेष न्यायाधीश (एमपी-एमएलए कोर्ट) अवनीश गौतम की अदालत ने सोमवार को करीब 32 वर्ष पुराने अवधेश राय हत्याकांड के मामले में माफिया मुख्तार अंसारी को उम्रकैद की सजा सुनाई है। अदालत ने उस पर 1.20 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना अदा न करने पर मुख्तार को छह महीने की अतिरिक्त कारावास की सजा भुगतनी होगी।
मुख्तार ने अब तक जेल में जो समय बिताया है, वह आजीवन कारावास की सजा में समायोजित हो जाएगी। अदालत ने बांदा के जेल अधीक्षक को निर्देशित किया और कहा कि अवधेश राय की हत्या से जुड़े मामले में अभियुक्त मुख्तार अंसारी जमानत पर है। उसकी जमानत निरस्त की जाती है। उसे तत्काल न्यायिक अभिरक्षा में लिया जाए।
इस फैसले के साथ ही तय हो गया कि अब माफिया मुख्तार अंसारी को ताउम्र जेल में ही रहना होगा। इससे पहले दिल्ली, लखनऊ और गाजीपुर की अदालतें भी मुख्तार अंसारी को सजा सुना चुकी हैं। जानकारी मुताबिक, तीन अगस्त 1991 को चेतगंज थाने से लगभग सौ मीटर की दूरी पर स्थित घर के दरवाजे पर ही अंधाधुंध गोलियां बरसाकर अवधेश राय की दिनदहाड़े हत्या कर दी गई थी।
बदमाश बिना नंबर प्लेट की सफेद रंग की मारुति वैन से आए थे। परिजन अवधेश को लेकर अस्पताल गए, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया था। इस मामले में अवधेश राय के छोटे भाई अजय राय की तहरीर के आधार पर चेतगंज थाने की पुलिस ने मुख्तार अंसारी, भीम सिंह, राकेश न्यायिक, कमलेश सिंह और पूर्व विधायक अब्दुल कलाम के अलावा एक अज्ञात के खिलाफ हत्या और बलवा सहित अन्य आरोपों में मुकदमा दर्ज किया था।
मुकदमे के ट्रायल के दौरान ही कमलेश सिंह और पूर्व विधायक अब्दुल कलाम की मौत हो गई। भीम सिंह और राकेश न्यायिक की पत्रावली इलाहाबाद की अदालत में लंबित है। मुख्तार अंसारी के प्रकरण में अभियोजन और बचाव पक्ष की बहस पूरी होने के बाद एमपी-एमएलए कोर्ट ने बीते 22 मई को अपना आदेश सुरक्षित रख लिया था। अब सोमवार को सजा सुनाई गई है।
कोर्ट ने मामले को दुर्लभतम नहीं माना, 104 पेज में दिया फैसला
एमपी-एमएलए कोर्ट ने 104 पेज के फैसले में कहा कि अभियुक्त के खिलाफ हत्या का अपराध साबित हो चुका है। सुप्रीम कोर्ट का हवाला देते हुए अदालत ने कहा है कि दुर्लभ से दुर्लभतम प्रकरण में ही मृत्युदंड की सजा दी जा सकती है। यह प्रकरण दुर्लभ से दुर्लभतम श्रेणी में नहीं आता है। अदालत में अभियोजन की ओर से सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी विनय कुमार सिंह और वादी के अधिवक्ता अनुज यादव ने पक्ष रखा।
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हाथ जोड़ कर सिर झुकाए खड़ा रहा मुख्तार
अवधेश राय हत्याकांड का फैसला सुनाने के दौरान मुख्तार अंसारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये दो बार पेश हुआ। वह बांदा की जेल में बंद है। अदालत में मौजूद अधिवक्ताओं के मुताबिक, दोषी करार दिए जाने और सजा सुनाने के दौरान मुख्तार अंसारी हाथ जोड़ कर और सिर झुकाए खड़ा रहा। वह थका हुआ सा दिख रहा था। दोषी करार दिए जाने से पहले उसने खुद को निर्दोष बताया और कहा कि उसे राजनीतिक रंजिश में फंसाया गया है। वहीं, सजा सुनाए जाने के दौरान मुख्तार ने वर्ष 2005 से अब तक जेल में बिताई गई लंबी अवधि, बीमारी और अपनी अधिक उम्र का हवाला दिया। अदालत से विनती किया कि उसे कम से कम दंड से दंडित किया जाए।
बुजुर्ग और बीमार है मुख्तार, मिले न्यूनतम दंड
अदालत में मुख्तार के अधिवक्ता आदित्य वर्मा ने कहा कि अभियुक्त बुजुर्ग और बीमार है। अभियुक्त को न्यूनतम दंड से दंडित किया जाए। वहीं, सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी विनय कुमार सिंह ने कहा कि अभियुक्त का लंबा आपराधिक इतिहास है। अवधेश राय की हत्या दिनदहाड़े किया जाना साबित है और यह दुर्लभ से दुर्लभतम केस की श्रेणी में आता है। ऐसे में अभियुक्त को अधिकतम दंड से दंडित किया जाए।
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