याची के अधिवक्ता ने दलील दी कि याची निर्दोष है, उसके खिलाफ कोई प्रत्यक्ष साक्ष्य नहीं है। याची से स्नेहा की कभी मुलाकात नहीं हुई, उनके बीच केवल सोशल मीडिया पर बातचीत होती थी। मृतका का शव तौलिए के फंदे से लटका मिला था, इससे आत्महत्या संभव नहीं है।
पुलिस ने नामजद हॉस्टल संचालक को हत्या के आरोप से बचाने के लिए साजिशन याची को फंसाया है। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए याची की जमानत मंजूर कर ली। कहा कि केवल आरोप या साधारण उत्पीड़न को आत्महत्या के लिए उकसावा नहीं माना जा सकता जब तक स्पष्ट इरादा और प्रत्यक्ष कृत्य न हो।