जिला अदालत से जमानत अर्जी खारिज होने के बाद आरोपियों ने उच्च न्यायालय में जमानत याचिका दाखिल की थी। सुनवाई के बाद उच्च न्यायालय ने जमानत मंजूर करते हुए कहा कि मामला इफ्तार पार्टी के आयोजन, वीडियो अपलोड करने और उसके जरिए धार्मिक सौहार्द बिगाड़ने के आरोपों से जुड़ा है। अदालत ने माना कि मामले की जांच जारी रह सकती है और इसके लिए आरोपियों को लगातार जेल में रखना आवश्यक नहीं है।
उच्च न्यायालय ने यह भी उल्लेख किया कि आरोपी 17 मार्च 2026 से जेल में बंद हैं। उन्होंने अपने कृत्य पर खेद व्यक्त किया है और भविष्य में ऐसी गतिविधि दोबारा न करने का आश्वासन दिया है। इन परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने उन्हें जमानत पर रिहा करना न्यायोचित माना।