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Varanasi News: बिरयानी खाकर गंगा में अवशेष फेंकने वाले आरोपियों की रिहाई, हाईकोर्ट से मंजूरी; पढ़ें आदेश

Tue, 19 May 2026 05:26 AM IST
Aman Vishwakarma अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

Varanasi News: गंगा में नाव पर बिरयानी खाने और अवशेष फेंकने के मामले में गिरफ्तार आठ आरोपियों को उच्च न्यायालय से जमानत मिल गई। सोमवार को जिला अदालत ने बंधपत्र और जमानतदार दाखिल होने के बाद रिहाई का आदेश दिया। अदालत ने कहा कि जांच आरोपियों को जेल में रखे बिना भी जारी रह सकती है।
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गंगा में इफ्तार पार्टी करने वाले आरोपी युवक। - फोटो : अमर उजाला
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Varanasi News: गंगा नदी में नाव पर बिरयानी खाने और उसके अवशेष नदी में फेंकने के मामले में गिरफ्तार आठ आरोपियों को उच्च न्यायालय से जमानत मिलने के बाद सोमवार को जिला अदालत ने रिहा करने का आदेश जारी कर दिया। अदालत ने जमानतदार और बंधपत्र दाखिल होने के बाद जिला जेल अधीक्षक को आरोपियों की रिहाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।

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मामला उस समय चर्चा में आया था जब भारतीय जनता युवा मोर्चा के महानगर अध्यक्ष रजत जायसवाल ने कोतवाली थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि मुस्लिम समुदाय के कुछ लोगों ने गंगा नदी में नाव पर बैठकर चिकन बिरयानी खाई और उसके अवशेष गंगा में फेंक दिए। आरोप था कि इस घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर प्रसारित किया गया, जिससे धार्मिक भावनाएं आहत हुईं और सामाजिक सौहार्द प्रभावित होने की आशंका बनी।

प्रकरण में कोतवाली पुलिस ने मोहम्मद आजाद अली, मोहम्मद तहसीम, निहाल अफरीदी, मोहम्मद तौसीफ अहमद और मोहम्मद अनस समेत आठ लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद निचली अदालत ने सभी आरोपियों को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया था।

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जिला जेल अधीक्षक को आदेश

जिला अदालत से जमानत अर्जी खारिज होने के बाद आरोपियों ने उच्च न्यायालय में जमानत याचिका दाखिल की थी। सुनवाई के बाद उच्च न्यायालय ने जमानत मंजूर करते हुए कहा कि मामला इफ्तार पार्टी के आयोजन, वीडियो अपलोड करने और उसके जरिए धार्मिक सौहार्द बिगाड़ने के आरोपों से जुड़ा है। अदालत ने माना कि मामले की जांच जारी रह सकती है और इसके लिए आरोपियों को लगातार जेल में रखना आवश्यक नहीं है।

उच्च न्यायालय ने यह भी उल्लेख किया कि आरोपी 17 मार्च 2026 से जेल में बंद हैं। उन्होंने अपने कृत्य पर खेद व्यक्त किया है और भविष्य में ऐसी गतिविधि दोबारा न करने का आश्वासन दिया है। इन परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने उन्हें जमानत पर रिहा करना न्यायोचित माना। 
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