चातुर्मास के दौरान बौद्ध और जैन संन्यासी एक स्थान पर रहकर साधना करते हैं। सारनाथ में इस बार 74 बौद्ध संन्यासी वर्षा वास करेंगे वहीं दूसरी ओर जैन मंदिरों में इस बार कोई भी जैन साधु अभी तक चातुर्मास के लिए नहीं पहुंचा है। 17 जुलाई से जैन धर्मावलंबियों का चातुर्मास शुरू होता है। यानी इन चार महीनों में संत यात्रा नहीं करते हैं। बल्कि एक ही स्थान पर रहकर भगवान की भक्ति करते हैं।
धम्म शिक्षण संस्थान के संस्थापक भंते चंदीमा थेरो ने बताया कि इस बार चातुर्मास में 60 बौद्ध संन्यासी धम्म लर्निंग सेंटर में, चाइना मंदिर में चार और थाई मंदिर में 10 बौद्ध संन्यासी वर्षा वास करेंगे। दिगंबर जैन समाज के उपाध्यक्ष राकेश जैन ने बताया कि इस बार किसी जैन संन्यासी के आने की सूचना नहीं है। इस बार संभावनाएं भी कम नजर आ रही हैं।