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नाट्य मंच से गेशे जम्पा ने उठाई तिब्बत मुक्ति की आवाज

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बनारस रंग महोत्सव के समापन समारोह के अंतिम दिन गेशे जम्पा में तिब्बती शरणार्थियों का दर्द हर किसी ने महसूस किया। साहित्यकार डॉ. नीरजा माधव के उपन्याय गेशे जम्पा पर आधारित नाट्य मंचन में देश में निवास करने वाले तिब्बती शरणार्थियों की मुक्ति साधना और सांस्कृतिक व सामाजिक अस्मिता की छटपटाहट नजर आई।
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नागरी नाटक मंडली के शाकुंतलम स्टूडियो में रंग संस्था कामायनी के कलाकारों ने गेशे जम्पा का जीवंत मंचन किया। मुख्य पात्र गेशे जम्पा तिब्बत का तो नायिका देवयानी भारत का प्रतिनिधित्व करती है। तिब्बतियों की स्वतंत्र सांस्कृतिक और धार्मिक अस्मिता के प्रश्न पर छाई वैश्विक चुप्पी तोडने की दिशा में एक छोटी सी हलचल के रूप में नीरजा माधव का यह अनूठा उपन्यास तिब्बती अनुभूति और उनकी लोक संस्कृति की जीवंत अभिव्यक्ति है। नाट्य रूपांतरण वीना सहाय, संगीत शैज खान और निर्देशन एवं डिजाइन सुमित श्रीवास्तव का रहा। गेेशे जम्पा की भूमिका में उमेश भाटिया, देवयानी की भूमिका में विशाखा आहूजा ने बेहतरीन अभिनय किया। इसके अलावा नीलम सिंह, अरविंद राय, नीलम पाल, अमित अग्रवाल, नवीन चंद्रा, आयुष सिंह, विशाल तिवारी, कंचन शमा, अनुराधा गुप्ता, साहेब कुमार सौरभ, राहुल कुमार रजक, अवनीश कुमार, ऋ षभ जायसवाल, अनंत श्रीवास्तव, अनंत श्रीवास्तव, अमित अग्रवाल, साहेब कुमार सौरभ ने भी सहयोग किया। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि कुलपति प्रो. कल्पलता पांडेय, विशिष्ट अतिथि रीता जायसवाल रहीं।
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