'शहर की सरकार' चुनने में बनारस मुस्लिम मतदाताओं ने पूरा उत्साह दिखाया। मुस्लिम इलाकों में मतदान केंद्रों पर सुबह से शाम तक मतदाताओं की कतार लगी रही। हालांकि ये मतदाता ‘पंजा’ और ‘साइकिल’ में बंटे नजर आए। यहां ‘एक पंजा और एक साइकिल’ का नारा खूब चला। सिर्फ मुस्लिम मतदाता ही नहीं यादव वोट भी इन्हीं पार्टियों में बंटा नजर आया। हालांकि कुछ वोट भाजपा, बसपा और निर्दल प्रत्याशियाें को भी मिले हैं।
मुस्लिम और यादवों के सरदारों की मानें तो उनके समुदाय के वोट पार्षद पर सपा और महापौर पर कांग्रेस को पड़े हैं। रणनीतिकार मानते हैं कि हार-जीत किसी की भी हो लेकिन लड़ाई कांग्रेस और भाजपा के बीच रहेगी। हार-जीत का अंतर कम रहेगा।
मदनपुरा, रेवड़ी तालाब, लल्लापुरा, बजरडीहा, दालमंडी, बेनियाबाग आदि मुस्लिम इलाकों के वोट कांग्रेस और सपा प्रत्याशियों को मिले हैं। वहीं सरैया, पीलीकोठी, बड़ी बाजार, जलालीपुरा, कोनिया, अलईपुरा आदि इलाके में भी मतदाताओं का रुझान सपा और कांग्रेस की ओर ही रहा।
कुछ बूथों पर मुस्लिम मतदाता सरकार की नीतियों से नाराज नजर आए। जहीर अनवर, हाजी बाबू का कहना था कि कारोबार चौपट हो रहा है। जनता अब बदलाव चाहती है। 22 साल से विकास के नाम पर कुछ नहीं हुआ है।
सीवर, सड़क, पानी और जाम की समस्या दिन-ब-दिन बढ़ती ही गई। अच्छे दिनों के सपनों की जगह बुरे दिन आ गए हैं। बीएचयू के राजनीति विज्ञान विभाग के प्रो. कौशल किशोर मिश्र का कहना है कि मुस्लिम महिलाएं तीन तलाक के मुद्दे पर भाजपा के साथ हैं जबकि पुरुष पीएम मोदी का विरोध कर रहे हैं।