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वाराणसी नगर निगम: हंगामे के बाद हुआ कार्यकारिणी का चुनाव

Wed, 18 Jul 2018 12:03 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
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टाउन हॉल में हुई बैठक - फोटो : अमर उजाला
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वाराणसी नगर निगम चुनाव के आठ माह बाद आखिरकार मंगलवार को वाराणसी के टाउन हाल में 12 सदस्यों की कार्यकारिणी चुन ली गई। चुनाव से पहले मुकदमा वापसी की मांग को लेकर विपक्ष टाउन हाल के बाहर धरने पर बैठ गया।

महापौर धरना स्थल पर पहुंची और उनकी मांगों को पूरा करने का आश्वासन दिया। इसके बाद सदन में सभी सदस्यों की सहमति से छह भाजपा, तीन कांग्रेस, दो सपा और एक निर्दल को कार्यकारिणी का सदस्य चुन लिया गया। हालांकि मतदान करने के लिए विधायक एमएलसी सहित कुल 94 सदस्य उपस्थित हो गए थे।
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एक दिसंबर को नगर निगम चुनाव के परिणाम आने के बाद से तीसरे प्रयास में मंगलवार को कार्यकारिणी चुनाव हो पाया। पहला जनवरी में और दूसरा मार्च में चुनाव कराने का प्रयास हुआ, जो सफल नहीं रहा। तीसरे प्रयास में मंगलवार को इस चुनाव में सफलता मिल पाई।

सुुबह 10.30 बजे विपक्ष के पार्षद टाउन हाल मैदान पहुंचे और हॉल के बाहर धरने पर बैठ गए। विपक्ष 23 मार्च को सदन की बैठक के दौरान हुए हंगामे में दर्ज मुकदमे को वापस करने की मांग करने लगे। इसकी जानकारी मिलते ही महापौर मृदुला जायसवाल 10.59 बजे विपक्ष के धरनास्थल पर पहुंची और उन्होंने उनकी मांगों को पूरा करने का आश्वासन दिया।

इसके बाद सभी सदस्य 11 बजे सदन में पहुंच गए। सदन की कार्यवाही वंदे में पिछली बार हुए हंगामे को लेकर निर्दलीय पार्षद अजीत सिंह ने सदन के सामने निंदा प्रस्ताव रखा और मुकदमे को वापस लेने की बात कही। जिसे सभी पार्षदों ने प्रस्ताव को सहमति दे दी। सदन की अध्यक्ष महापौर मृदुला जायसवाल ने नगर आयुक्त डॉ. नितिन बंसल को कानूनी प्रक्रिया पूरी करते हुए विधि सम्मत मुकदमा वापस लेने का निर्देश दिया।

अध्यक्ष ने इसके बाद चुनाव की प्रक्रिया शुरू करने की घोषणा की। सभी पार्टी की ओर से सदस्यों का नाम दिया गया, जिस पर कोई आपत्ति नहीं हुई। अंतत: अध्यक्ष ने निर्विरोध सभी 12 सदस्यों के नाम की घोषणा कर दी। इन सदस्यों में भाजपा के छह, कांग्रेस के तीन, सपा के दो और निर्दल का एक पार्षद शामिल हैं। 

आठ साल बाद हुआ कार्यकारिणी का चुनाव

धरना देते विपक्षी पार्षद - फोटो : अमर उजाला
17 जुलाई को टाउन हाल में आयोजित कार्यकारिणी का चुनाव आठ साल बाद हुआ है। इससे पहले की सभी कार्यकारिणी चुनाव विरोध और न्यायालयों में विचाराधीन हो गई था। इसके बाद यह चुनाव संपन्न हुआ है।

नगर निगम में कौशलेंद्र सिंह का कार्यकाल 2007 से लेकर 2012 तक रहा। इसमें पहले साल और दूसरे साल तक कार्यकारिणी का चुनाव हुआ, लेकिन दो बार के बाद विरोध हो गया और बाकी के तीन साल खाली ही रह गया।

इसके बाद महापौर राम गोपाल मोहले चुने गए। इनके कार्यकाल में भी जैसे ही चुनाव के लिए सदन की बैठक आयोजित की गई विरोध और हंगामा हो गया। इसके बाद मामला न्यायालय में चला गया और पांच साल  कार्यकारिणी सदस्य नहीं चुने गए। 

नगर निगम में पहले साल कार्यकारिणी का चुनाव सदस्यों के आधार पर होता है। इन सदस्यों का कार्यकाल एक साल रहेगा। इसके बाद चुने गए सदस्यों में से आधे सदस्यों को लाटरी के माध्यम से बाहर किया जाता है और फिर बाकी के बचे सदस्य सर्वसम्मति से नए सदस्यों को चुनकर संख्या पूरी करते हैं।

अगर सर्वसम्मति की स्थिति नहीं बनती है तो चुनाव होता है। यह कार्यकाल दो साल का होता है। बाकी के बचे दो साल में फिर एक-एक साल के लिए चुनाव होता है।

सभी दलों के लिए मजबूरी था कार्यकारिणी चुनाव

वाराणसी नगर निगम
टाउन हाल में हुआ चुनाव पार्षदों की आपसी सहमति नहीं, बल्कि सभी दलों की कुछ न कुछ मजबूरी थी। अगर इस बार भी ये आपस में लड़ते तो इनका फायदा अधिकारी और दूसरे जनप्रतिनिधि उठाते। ऐसे में इस लिए ही कार्यकारिणी का चुनाव आपसी सहमति के आधार पर शांतिपूर्ण हो गया था।

कार्यकारिणी का चुनाव होने के बाद शहर विकास का कोई भी प्रस्ताव बनता है तो बिना कार्यकारिणी की सहमति के पास नहीं होता है, लेकिन कार्यकारिणी नहीं बनती है तो अधिकारी अपने मन से ही उसेे पास करके काम करा देते हैं।

यहां भी कार्यकारिणी का चुनाव नहीं हुआ था, ऐसे में  अधिकारी अपने मन से काम करा रहे थे। इससे पार्षदों के हाथ कट गए थे। कुछ इलाकों में तो पार्षदों के कहने के बाद भी कोई काम नहीं होता था। यहां तक की चौका बिछाना तो दूर सीवर की सफाई तक नहीं हो पाती थी।

विपक्ष के पार्षद तो आरोप प्रत्यारोप लगाकर हो हल्ला भी मचा लेते थे, लेकिन भाजपा के पार्षदों की हालत इसलिए खराब थी कि वे महापौर से शिकायत के अलावा हो हल्ला भी नहीं कर सकते थे।

इसलिए सभी लोग चाह रहे थे कि कार्यकारिणी का चुनाव होना चाहिए, ताकि अधिकारी मनमानी न कर सकें। वहीं मुकदमा समाप्त करके दोनों पक्षों को अपना कार्यकाल भी पूरा करना था।
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जिसने दर्ज कराया मुकदमा, उसी ने कराया समझौता

धरना देने से लेकर चुनाव तक सब कुछ पहले से तय था - फोटो : अमर उजाला
पिछले बार हुए हंगामे के दौरान महापौर के साथ हुए दुर्व्यवहार को लेकर भाजपा पार्षद दल के नेता राजेश जायसवाल ने ही विपक्ष के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। लेकिन इस चुुनाव में वे पिछले दस दिनों से बैठक करके विपक्ष के पार्षदों को समझाने में लगे रहे।

अंत में उन्होंने मुकदमा वापस लेने और कार्यकारिणी चुनाव कराने की बात पर सहमति देकर विकास की बात की। इसके बाद छह-छह सदस्यों पर सहमति बनी। हालांकि जब इसके लिए उनसे पूछा गया तो उन्होंने कहा कि मैने शहर के विकास को लेकर दोनों पक्षों से बातचीत की है। 


22 मिनट में चुने गए 12 सदस्य
 सदस्यों का कार्यकारिणी चुनाव जो टाउन हाल में आयोजित किया गया उतना समय तो किसी सदन के कोरम को पूरा करने में लग जाता है। 11 बजे से शुरू होने वाली कार्यकारिणी की बैठक व्यवस्था सही न होने से 22 मिनट के विलंब से शुरू हुई।

11.22 बजे महापौर ने सदन की कार्यवाही की घोषणा की। इसके बाद 11. 23 पर वंदेमातरम शुरू हुआ। 11.24 पर सदन के चुनाव की कार्यवाही शुरू हो गई। इसके बाद निर्दल पार्षद अजीत सिंह ने निंदा प्रस्ताव पढ़ा।

11.30 पर नामांकन शुरू हुआ। 11 40 पर सभी दलों के नामों को स्वीकृति सदन ने दे दी। 11.42 पर महापौर ने सभी सदस्यों के नामों की घोषणा की। फिर 11.44 पर सदन के समापन की घोषणा कर दी गई।
 
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