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आईएमएस बीएचयू को गांधी जयंती तक मिल जाएंगे 100 नए डॉक्टरः कुलपति

Tue, 17 Jul 2018 11:43 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
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कुलपति प्रो. राकेश भटनागर - फोटो : अमर उजाला
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बीएचयू के सर सुंदरलाल अस्पताल में डॉक्टरों और पैरा मेडिकल स्टाफ की कमी दूर करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। आईएमएस बीएचयू में डॉक्टरों के 100 और पैरामेडिकल स्टाफ के 1200 पद गांधी जयंती यानी दो अक्तूबर तक भर लिए जाएंगे।
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कुलपति प्रो. राकेश भटनागर के मुताबिक इसके बाद मरीजों की सुविधाओं के लिए एम्स की तर्ज पर कुछ नई योजनाएं और जांच की सुविधाएं भी बढ़ाई जाएंगी। आईएमएस को एम्स जैसी सुविधाओं के लिए प्रो. भटनागर के कुलपति बनने के बाद ही कार्यवाही शुरू हुई थी।

19 जून को दिल्ली में इसके लिए समझौता हो चुका है। यहीं नहीं, आईएमएस की 10 सदस्यीय टीम यहां आकर गैप एनालिसिस भी कर चुकी है। अब टीम की रिपोर्ट के आधार पर ही आगे की कार्रवाई होगी।
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प्रो. भटनागर ने बताया कि आईएमएस में डॉक्टरों के वर्तमान में 325 पदों में से 104 पद खाली हैं। इस वजह से ओपीडी में डॉक्टर मरीजों को कम समय दे पाते हैं।

अब चिकित्सा अधीक्षक समेत विभागवार खाली पदों के लिए आए आवेदनों की स्क्रीनिंग चल रही है। स्क्रीनिंग के बाद साक्षात्कार होंगे। दो अक्तूबर तक सभी पद भर लिए जाएंगे, जिससे ओपीडी में मरीजों का दबाव कम होगा।

कुलपति ने बताया कि डॉक्टरों की कमी के मद्देनजर ही ओपीडी का समय बढ़ाया गया है। उन्होंने बताया कि अभी तक अस्पताल में 600 नर्स काम कर रही हैं। इनकी संख्या बढ़ाई जाएगी। पैरामेडिकल स्टाफ के 1200 पदों पर भर्तियों के लिए यूजीसी की स्वीकृति मिल गई है। 
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धीरे-धीरे मिलेंगी एम्स जैसी सुविधाएं

कार्यशाला में बोलते प्रो राकेश भटनागर - फोटो : अमर उजाला
कुलपति कहते हैं कि ज्यादातर लोग चाहते थे कि आईएमएस बीएचयू में एम्स जैसी सुविधाएं तो मिलें लेकिन बीएचयू की स्वायत्तता पर आंच न आए। हमने इसी मंशा से पहल की और इस दिशा में लगातार सफलता मिल रही है। एम्स में 800 डॉक्टरों के मुकाबले आईएमएस में केवल 300 पद हैं।

धीरे-धीरे एम्स जैसी हर सुविधा यहां मिल जाएगी। यहां हर साल 100-100 चिकित्सक भी मिले तो आने वाले दिनों में डॉक्टरों की कमी नहीं रहेगी। गैप एनालिसिल कमेटी की रिपोर्ट के बाद सरकार फंड देगी, फिर आग की प्रकिया के लिए कदम बढ़ाए जाएंगे।

कुलपति प्रो. राकेश भटनागर का कहना है कि आईएमएस बीएचयू में एम्स जैसी सुविधाएं तो मिलें लेकिन बीएचयू की स्वायत्तता पर आंच न आए। हमने इसी मंशा से पहल की और इस दिशा में लगातार सफलता मिल रही है।  
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