नौवीं मुहर्रम पर अजाखानों में या हुसैन की गूंज रही लेकिन इमाम चौक पर सन्नाटा पसरा रहा। कर्बला के शहीदों को याद करते हुए अजादारों ने उनके गम में मातम की रवायत को शनिवार को भी निभाया। शहर में उठने वाले जुलूस कोरोना संक्रमण के कारण स्थगित रहे लेकिन मजलिसों के जरिए परंपराओं को निभाया गया।
शनिवार को 9वीं मोहर्रम पर शहर बनारस के अजीम दूल्हा का जुलूस भी नहीं उठाए, न ही गश्ती आलम उठा, न इमाम चौक पर ताजिये बैठाए गए। अजादारी खुल के ना कर पाने से सारे हुसैनियों में मोहर्रम के गम के साथ मायूसी भी रही। शहर में आज की रात होने वाले सैकड़ों जलसे स्थगित रहे। 9वीं मोहर्रम को कर्बला के 72 से इमाम हुसैन के 6 महीने के बच्चे अली असगर की शहादत का गम मनाया जाता है।
9 वीं मोहर्रम की रात को शब ए आशूर कहते हैं। ये इमाम हुसैन की शहादत से पहले की रात थी। इस रात को इमाम हुसैन के काफि ले ने अपने खेमे में इबादत के लिए गुजारी। कर्बला की जंग में अजीब मंजर देखे गए। आज की रात को जब इमाम हुसैन के काफि ले के सामने 50 हजार से ऊपर की यजीदी फौज थी। इस समय यजीद की फ ौज का जनरल हूर अपने बेटे के साथ इमाम हुसैन के खेमे में आ गए और 10 मोहर्रम को इमाम हुसैन के साथ शहादत पेश की।