केस - 1
गोरखपुर के रहने वाले विकास (बदला हुआ नाम) को दो साल पहले उनके परिजनों ने भर्ती कराया था। इसके बाद कभी परिजन उनका हालचाल लेने ही नहीं आए। विकास के ठीक होने के बाद घर का पता और मोबाइल नंबर ढूंढने पर दोनों फर्जी निकला। नतीजन किसी तरह से विकास से ही पूछकर उन्हें उनके घर पहुंचाया गया।
केस - 2
बिहार के गोपालगंज की रहने वाली सुनीता देवी (बदला हुआ नाम) को अत्यधिक गुस्सा आता था। परिजनों ने उन्हें छह माह पहले मानसिक अस्पताल में एडमिट कराया था। परिजन कभी-कभी उनसे मिलने आते थे। लेकिन उनके ठीक होने के बाद कोई लेने ही नहीं आया। इसके बाद अस्पताल प्रशासन ने किसी तरह उन्हें घर भिजवाया।
क्या बोले अधिकारी
मानसिक रोगियों के साथ किसी भी प्रकार का भेदभाव उचित नहीं है। वह तुरंत ही बीमारी से उबरे होते हैं। ठीक होते ही उन्हें पता चले कि उनके परिजन उन्हें छोड़ गए है, ऐसे में फिर से समस्या हो सकती है। -डॉ. चंद्र प्रकाश मल्ल, निदेशक, मानसिक अस्पताल