बदलते समाज का हो स्थानीय विश्लेषण
बीएचयू के कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि शोधकर्ताओं को बदलते समाज का स्थानीय स्तर पर विश्लेषण करना चाहिए। स्थानीय परिस्थितियों और सामाजिक बदलावों को समझकर ऐसे मौलिक शोध, पुस्तकें और अध्ययन सामग्री विकसित करने की जरूरत है, जिन्हें वैश्विक स्तर पर पढ़ा जाए और उन पर चर्चा हो। उन्होंने शोध को समाज से जोड़ने और भारतीय संदर्भों को अकादमिक विमर्श में प्रमुखता देने पर जोर दिया।
वहीं, पद्मश्री से सम्मानित निवेदिता भिड़े ने याज्ञवल्क्य-मैत्रेयी संवाद और रामायण-महाभारत के स्त्री पात्रों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारतीय समाज के ऐतिहासिक अनुभवों और सामाजिक संबंधों को केंद्र में रखकर विमर्श विकसित किया जाना चाहिए। इससे समाज में स्त्री की भूमिका और बदलते सामाजिक संदर्भों को बेहतर ढंग से समझा जा सकेगा।