गंगा में पानी की कमी और अंधाधुंध भूजल के दोहन के कारण वाराणसी में गर्मी के साथ शुरू हुआ पेयजल संकट अब विकराल रूप ले चुका है। जलकल की ओर से घरों में पेयजल पहुंचाने के लिए गंगा किनारे बने भदैनी रवाटर पम्पिंग स्टेशन के पंप दोगुने समय 16 घंटे तक चलने के बावजूद 90 एमएलडी ही आपूर्ति मिल रही है।
रिजर्व में रखे गए पंपों को चलाने के बावजूद पानी की जरूरत पूरी नहीं हो पा रही है। जलापूर्ति से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक गर्मी के चलते पानी की खपत सामान्य दिनों की तुलना में 50 एमएलडी से अधिक बढ़ी है। जलस्तर गिरने से पचास फीसदी से अधिक नलकूप अपनी क्षमता के अनुरूप पानी नहीं दे पा रहे हैं। वहीं, दो-तिहाई हैंडपंपों से भी पानी निकलना बंद हो गया है।
गर्मी के मौसम में वाराणसी में 50 एमएलडी पानी की मांग बढ़ गई है और यहां पानी की जरूरत 350 एमएलडी तक पहुंच गई है। इसमें 100 एमएलडी आपूर्ति पानी गंगा से लिफ्ट किया जाता है और 210 एमएलडी नलकूपों के जरिए आपूर्ति की जाती है। मगर, पचास फीसदी नलकूप पूरी क्षमता से ही नहीं चल पा रहे हैं। वहीं, भूजल स्तर नीचे होने से शहर के 20 नलकूप बंद हो गए हैं।
संकट को देखते हुए 25 ट्यूबवेल और 28 मिनी ट्यूबवेल में कॉलम पाइप बढ़ाई गई है। करीब तीन हजार हैंडपंप भी बेकार हो गए हैं। ऐसे में शहर की आधी जनसंख्या को पानी नहीं मिल पा रहा है। इसको देखते हुए जलकल ने जलापूर्ति की मात्रा के साथ अवधि भी घटा दी है।
जलकल के महाप्रबंधक वीके सिंह ने बताया कि भदैनी वाटर राइजिंग पाइप से गंगा का जलस्तर हफ्ते भर पहले ढाई फीट ऊपर था जो घटकर रविवार को एक फीट ही रह गया है।
यही हाल रहा तो भदैनी के पंप बंद होने से शहर में जलापूर्ति ठप हो जाएगी। इस बारे में शासन को अवगत करा दिया गया है। बांधों से पानी छोड़ जाने या फिर मानसून सक्रिय होने पर ही स्थिति में सुधार होने की उम्मीद है।
गंगा नहीं बढ़ा जलस्तर तो ठप होगी जलापूर्ति
काशी में सिमटी गंगा
- फोटो : अमर उजाला
वाराणसी की जनता की प्यास बुझाने के लिए 100 एमएलडी पानी गंगा से लिफ्ट लिया जाता है। मगर, गंगा का जलस्तर कम होने से पाइप से गंगा कुछ ही फीट की ऊंचाई पर रह गई है। ऐसे में यदि गंगा का जलस्तर कम हुआ या नहीं बढ़ा तो यहां से पानी लिफ्ट करना बंद करना होगा।
करीब दो महीने पहले जिलाधिकारी योगेश्वर राम मिश्र ने शासन को पत्र लिखकर गंगा में पानी छोड़ने को कहा था। इसके बाद केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने भी मई के अंतिम सप्ताह में पानी छोड़ने का आश्वासन दिया था। मगर, गंगा में पानी नहीं छोड़ा गया। हालांकि पूरा मामला मुख्यमंत्री के संज्ञान में आने के बाद प्रशासनिक मशीनरी भी सक्रिय है।
ये है वर्तमान में पेयजल की स्थिति
-शहर को पेयजल की आवश्यकता 350 एमएलडी पानी
- गंगा से लिफ्ट हो रहा है महज 90 एमएलडी पानी
- भूजल स्तर गिरने से शहर के 20 नलकूप हुए बंद
- 25 ट्यूबवेल और 28 मिनी ट्यूबवेल में कालम पाइप बढ़ाया
पानी का आपातकाल किया जाए घोषित- एमएलसी
बनारस में पानी की आफत को देखते हुए एमएलसी शतरुद्र प्रसाद ने मांग की कि पानी का आपातकाल घोषित किया जाए और पानी की विलासिता पर रोक लगाई जाए। भीषण गर्मी में गंगाजल का स्तर निमभनतम स्तर पर पहुंच गया है और राज्य सरकार व जिला प्रशासन को इसे वरीयता देनी चाहिए।
उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया कि घरों में पानी सीमित मिल रहा है और होटल में स्वीमिंग पुल और बॉथ टब के जरिए धड़ल्ले से पानी बहाया जा रहा है। गंगा के जलस्तर को बढ़ाने के लिए लिखे गए पत्र पर सरकारी की अनदेखी है।
उन्होंने कहा कि पानी की मांग और आपूर्ति को सार्वजनिक किया जाए और इस संकट से निपटने के लिए सरकार योजना बनाए। उन्होंने टेढ़ी बांध और नरौरा बांध से प्रचुर मात्रा में गंगा जल छोड़ने की भी मांग की।