अपराधियों से मिलीभगत कहिए या नियम-कानून की अनदेखी, खेल ऐसा है कि वाराणसी पुलिस फेल हो जा रही है और अपराधी पास। पिछले कुछ महीनों में हुईं ताबड़तोड़ वारदातों की तफ्तीश से गिरफ्तारी और आरोपियों के विरुद्ध कोर्ट में पैरवी तक यह खेल सामने आ चुका है।
अफसरों की बेपरवाही और प्रभावी मॉनीटरिंग न होने से मातहत मनमानी से बाज नहीं आ रहे हैं। मुख्यमंत्री के सख्त निर्देशों के बावजूद अपराधियों की नकेल कसने में पुलिस की ढिलाई से महकमे की किरकिरी हो रही है। वहीं, अपराधियों के बढ़ते हौसलों ने कानून व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौतियां खड़ी कर दी हैं।
भाजपा के पांच पार्षदों से बीते महीने गाजीपुर जेल में निरुद्ध बदमाश ने अपने गुर्गों के माध्यम से रंगदारी मंगवाई। क्राइम ब्रांच ने दो आरोपियों को सर्विलांस की मदद से गिरफ्तार किया और चालान भेजा। दशाश्वमेध, भेलूपुर, कोतवाली और जैतपुरा थाने में इस संबंध में मुकदमे दर्ज थे।
मगर, थानेदार दोनों आरोपियों का रिमांड लेना ही भूल गए और उन्हें जमानत मिल गई। इसी तरह, मिर्जामुराद थाने में 13 वर्षीय किशोर को अवैध हिरासत में रखने के मामले में दोष साबित होने के बावजूद कार्रवाई के नाम पर खानापूर्ति कर दी गई।
उधर, शिवपुर पुलिस ने अवैध शराब कारोबार के सिंडिकेट बृजेश मिश्रा को गिरफ्तार कर जेल भेजा लेकिन गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई नहीं की। नतीजतन, बृजेश जेल से जल्द छूट गया और अवैध शराब के कारोबार में जुट गया। इसी बीच फिर भारी मात्रा में शराब के साथ गिरफ्तार हुआ।
मातहत कर रहे मनमानी, अफसर बेपरवाह
जलकल के जेई के दो कातिलों को अब तक नहीं पकड़ सके
लंका-रवींद्रपुरी मार्ग पर सरकारी कामकाज के दौरान पांच जून की रात डेढ़ बजे जलकल के जेई सुशील कुमार गुप्ता और दो ठेकेदारों पर जानलेवा हमला हुआ। हालत यह रही कि इस हमले की जानकारी पुलिस को बुधवार की सुबह हुई।
हमले में जेई की जान चली गई। नाराज जल निगम के अधिकारियों, कर्मचारियों ने आंदोलन किया तो पुलिस ने शुरुआत में थोड़ी तेजी दिखाई लेकिन फिर कवायद नरम पड़ गई। लंबे-चौड़े दावों के बावजूद मामले के दस आरोपियों में दो प्रमुख आरोपियों को पुलिस अब तक गिरफ्तार नहीं कर सकी है।
मासूम की हत्या, परिजनों से कहा- कातिल खोजकर लाओ
जंसा थाने के दानूपुर गांव से सात जून की शाम चार साल का मासूम आशीष बनवासी लापता हुआ। जंसा थाने पर सूचना देने के बावजूद पुलिस ने मासूम को खोजने में रुचि नहीं दिखाई। अगले दिन उसका खून से लथपथ शव घर से कुछ दूरी पर मिला।
परिजनों और ग्रामीणों ने हल्ला-हंगामा किया तो मौके पर पहुंची पुलिस ने प्रभावी कार्रवाई का भरोसा तो दिलाया लेकिन अब तक उस भरोसे पर खरा नहीं उतर सकी। कातिलों की गिरफ्तारी तो हुई नहीं, उल्टे परिजनों को डराया-धमकाया जाने लगा। परिजनोें का कहना है कि पुलिस उन्हीं से कहती है कि हत्यारों को खोज कर लाओ।
फ्लाईओवर हादसे में 15 लोगों की जान गई और गिरफ्तारी किसी एक की नहीं
15 मई को कैंट रेलवे स्टेशन के समीप निर्माणाधीन चौकाघाट-लहरतारा फ्लाईओवर की दो बीम गिरने से 15 लोगों की मौत हुई। इस मामले में पुलिस ने अपनी ओर से मुकदमा दर्ज कराया।
एक महीना दस दिन से ज्यादा समय हो गया है बावजूद इसके न तो पुलिस की तफ्तीश किसी नतीजे तक पहुंच सकी है और न ही इस मामले में किसी एक आरोपी को गिरफ्तार किया जा सका है। कार्रवाई कहां तक पहुंची, किसी को कुछ पता नहीं। जबकि, सरकार की ओर से गठित अलग-अलग समितियों ने अपनी जांच रिपोर्ट दे दी है।
सिगरा पुलिस के सामने से भागे मुजरिम, पकड़ा इलाहाबाद पुलिस ने
सिगरा थाने में 28 अप्रैल को स्कूल ऑफ ब्रॉडकास्टिंग के संचालक साईं शेखर तिवारी सहित चार के खिलाफ धोखाधड़ी, यौन उत्पीड़न, छल और धमकाने के आरोप में मुकदमा दर्ज हुआ। सिगरा पुलिस से मिलीभगत कर आरोपी महमूरगंज स्थित स्कूल का कार्यालय बंद कर भाग गए।
पुलिस तकती रह गई। तफ्तीश के नाम पर मामले को जितना लटकाया जा सकता था, लटकाया गया। सिगरा पुलिस की आंख तब खुली जब मामले के आरोपियों को इलाहाबाद पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।