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Varanasi Ground Report: नमो घाट से कॉरिडोर तक क्या बदला? देखिए, बदलते बनारस में विकास को लेकर लोगों की राय

Tue, 14 Apr 2026 05:48 PM IST
Rahul Kumar Tiwari अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी

सार

Varanasi Ground Report: अमर उजाला की टीम ने वाराणसी में विकास के अलग-अलग पहलुओं की पड़ताल की। नमो घाट, काशी विश्वनाथ कॉरिडोर, बनारसी साड़ी उद्योग और रोपवे प्रोजेक्ट को लेकर लोगों ने अपनी राय रखी, जिससे कई तस्वीरें सामने आईं।
 
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Varanasi Ground Report - फोटो : अमर उजाला GFX
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विस्तार
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Varanasi Ground Report: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले अमर उजाला की टीम लगातार अलग-अलग जिलों से ग्राउंड रिपोर्ट कर रही है। इसी कड़ी में टीम वाराणसी पहुंची, जहां नमो घाट, काशी विश्वनाथ कॉरिडोर, बनारसी साड़ी उद्योग और शहरी रोपवे प्रोजेक्ट को लेकर लोगों से बातचीत की गई। इस दौरान यह जानने की कोशिश की गई कि विकास योजनाओं का आम जनजीवन, पर्यटन और रोजगार पर कितना असर पड़ा है।

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नमो घाट से बढ़ा पर्यटन और रोजगार
2024 में नमो घाट के निर्माण के बाद इलाके की तस्वीर तेजी से बदली है। अमर उजाला की टीम ने जब स्थानीय लोगों और पर्यटकों से बात की तो सामने आया कि यह बदलाव सिर्फ दिखावे तक सीमित नहीं, बल्कि लोगों के अनुभव में भी साफ झलकता है। पर्यटक पौलोमी दत्ता बताती हैं कि पहले यहां आने पर रास्ते और गलियां गंदगी से भरी रहती थीं, लेकिन अब पूरा इलाका साफ-सुथरा और व्यवस्थित नजर आता है। उनके मुताबिक, सिस्टम में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। पर्यटक अभिजीत का कहना है कि बदलता हुआ बनारस अब पहले से कहीं ज्यादा आकर्षक और बेहतर हो गया है। वहीं, पहली बार आए पुनीत खुराना ने यहां के माहौल को सुकून देने वाला बताया। भीलवाड़ा, राजस्थान से आईं कशिश लखवानी ने कहा कि यहां का वातावरण बेहद अच्छा है और लोगों का सहयोग भी सराहनीय है, जिससे यात्रा का अनुभव और बेहतर हो जाता है। स्थानीय नाविकों की जिंदगी में भी सकारात्मक बदलाव आया है। नाविक धर्मेंद्र साहनी ने बताया कि पहले आमदनी कम होती थी, लेकिन अब पर्यटकों की संख्या बढ़ने से कमाई में इजाफा हुआ है। वहीं, गोपाल दास का कहना है कि नमो घाट बनने के बाद नावों की संख्या भी बढ़ी है और अब यहां विदेशी पर्यटक भी पहले से ज्यादा आने लगे हैं। नमो घाट ने न सिर्फ बनारस की खूबसूरती को निखारा है, बल्कि स्थानीय लोगों के रोजगार और पर्यटन को भी नई दिशा दी है।



 बनारसी साड़ी कारोबार को मिली नई रफ्तार
वाराणसी का नाम आते ही बनारसी साड़ी की पहचान अपने आप सामने आ जाती है। वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट यानी ODOP योजना के तहत इस पारंपरिक उद्योग को नई रफ्तार मिली है। अमर उजाला की टीम ने जब साड़ी कारोबारियों और बुनकरों से बात की, तो बदलाव साफ तौर पर नजर आया। साड़ी कारोबारी राहुल मेहता बताते हैं कि 10-15 साल पहले बनारसी साड़ी को बाजार तलाशना पड़ता था, लेकिन पिछले एक दशक में हालात बदल गए हैं। अब अलग-अलग राज्यों से आने वाले पर्यटकों की संख्या बढ़ी है, जिससे साड़ियों की मांग में लगातार इजाफा हुआ है। उनके मुताबिक, अब बड़े-बड़े शोरूम खुल चुके हैं और कारोबार तेजी से आगे बढ़ रहा है। वे यह भी बताते हैं कि पहले इलाके की सफाई और बुनियादी सुविधाओं के लिए काफी प्रयास करने पड़ते थे, लेकिन जब से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने काशी को प्राथमिकता दी, तब से शहर एक नए मॉडल के रूप में उभरा है। रोड कनेक्टिविटी में बड़ा सुधार हुआ है, जिससे व्यापार को सीधा फायदा मिला है। वहीं बुनकर प्रदीप का कहना है कि पहले की तुलना में अब आमदनी बेहतर हुई है। काम के अवसर बढ़े हैं और बाजार तक पहुंच आसान हुई है, जिससे पूरे उद्योग को मजबूती मिली है।



काशी विश्वनाथ कॉरिडोर से मिली नई गति
काशी विश्वनाथ कॉरिडोर बनने के बाद से श्रद्धालुओं के अनुभव में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। अमर उजाला की टीम ने जब यहां आने वाले श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों से बात की, तो सुविधाओं और रोजगार दोनों में सुधार की तस्वीर सामने आई। श्रद्धालु ऐश्वर्या बताती हैं कि यह उनका होमटाउन है और यहां हमेशा अच्छा लगता है, लेकिन कॉरिडोर बनने के बाद अब सारी व्यवस्थाएं पहले से कहीं ज्यादा बेहतर और सुव्यवस्थित हो गई हैं। पुजारी पं. शिवम शर्मा के अनुसार, कॉरिडोर बनने से गंगा आरती अब पहले से ज्यादा सुगम और नजदीक से देखने को मिल रही है, वहीं श्रद्धालुओं की संख्या में भी बढ़ोतरी हुई है। पहली बार आए श्रद्धालु अजय कुमार ने बताया कि यहां का सौंदर्यीकरण अविश्वसनीय है। उन्होंने परिवार के साथ बिना किसी परेशानी के आराम से दर्शन किए और कहा कि हर किसी को यहां जरूर आना चाहिए।
मुंबई से आईं श्रद्धालु हर्षिता ने भी अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि यहां आकर उन्हें शांति का एहसास हुआ। कम समय में दर्शन हो गया और अस्सी घाट व गंगा आरती का दृश्य बेहद सुंदर लगा। स्थानीय निवासी रवि प्रताप सिंह का कहना है कि कॉरिडोर बनने से रोजगार के अवसर बढ़े हैं। सड़कों और बुनियादी सुविधाओं में सुधार हुआ है, जिससे स्थानीय लोगों को सीधा फायदा मिला है।
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काशी को आसमान से निहारेगा दुनिया 
आस्था और पर्यटन की नगरी वाराणसी में देश के पहले शहरी रोपवे प्रोजेक्ट की तैयारी अब अंतिम चरण में है। इस प्रोजेक्ट को लेकर स्थानीय लोगों में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। स्थानीय निवासियों का मानना है कि रोपवे शुरू होने के बाद शहर में यातायात का दबाव काफी हद तक कम हो जाएगा। बनारस में हर दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक पहुंचते हैं, जिससे सड़कों पर भीड़ बढ़ जाती है। ऐसे में रोपवे एक वैकल्पिक और सुगम परिवहन व्यवस्था के रूप में राहत देने का काम करेगा। लोगों का कहना है कि इससे न सिर्फ जाम की समस्या कम होगी, बल्कि पर्यटकों की संख्या में भी इजाफा होने की उम्मीद है। रोपवे के जरिए कम समय में एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचना आसान होगा, जिससे शहर घूमने का अनुभव और बेहतर बनेगा। कुल मिलाकर, यह प्रोजेक्ट बनारस में यातायात व्यवस्था को मजबूत करने के साथ-साथ पर्यटन को भी नई ऊंचाई देने वाला साबित हो सकता है।
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