वाराणसी की शिवांगी सिंह ने यूपी पहली महिला फाइटर पायलट बनने का गौरव हासिल किया है। शिवांगी सिंह सुखोई और तेजस जैसे लड़ाकू विमान उड़ाने के लिए तैयार हैं।
सपने देखना फिर उन्हें पूरा करने के लिए जुनून की हद तक गुजर जाने की कहानी का मूर्त रूप हैं शिवांगी। देश सेवा का जज्बा शिवांगी की रगों में है। उनके नाना भी आर्मी में थे। शिवांगी ने जब चलना सीखा उसके कुछ समय बाद से ही आकाश में परवाज भरने की ठान ली।
शिवांगी ने एक सपना देखा और उसे सच करने के लिए जी-जान से जुट गईं। आज वे फाइटर पायलट हैं। सुखोई और तेजस जैसे लड़ाकू विमान उड़ाने को पूरे रोमांच के साथ तैयार। प्रदेश की पहली महिला फाइटर पायलट बनी शिवांगी के लिए फाइटर प्लेन उड़ाने का ख्वाब पूरा करना आसान नहीं था।
बावजूद इसके शिवांगी ने न सिर्फ अपना सपना पूरा किया बल्कि दूसरी लड़कियों के लिए भी नजीर भी बनीं। बीते 16 दिसंबर को हैदराबाद स्थित एयर फोर्स एकेडमी में उन्हें फाइटर पायलट का तमगा मिला।
शिवांगी कहती हैं कि पहली बार जब मैंने प्लेन उड़ाया तो ऐसा लगा कि सारा संघर्ष जैसे सफलता की उड़ान में पंख बन गया हो। जैसे-जैसे मैंने आसमान में उड़ान भरी, लगा कि सब कुछ पीछे छूट रहा है और मैं सबसे ऊपर हूं।
जो लक्ष्य बनाएं, उस पर आगे बढ़ें
परिवार के साथ शिवांगी सिंह
- फोटो : अमर उजाला
शिवांगी की ज्वाइनिंग बतौर फ्लाइंग ऑफिसर हैदराबाद में ही हुई है। अब नए एयरक्राफ्ट में उनकी ट्रेनिंग शुरू होगी। इसे लेकर वे रोमांचित हैं। शिवांगी अपनी सफलता का श्रेय मम्मी-पापा और नाना को देती हैं। बताती हैं कि नाना आर्मी में थे। वे मुझे बेस कैंप में ले जाते थे।
वहीं से मेरे भीतर देश सेवा का जज्बा जगा। प्लेन मुझे बचपन से ही आकर्षित और रोमांचित करते थे। दो साल पहले जब भारतीय वायु सेना में फाइटर पायलट बनने का रास्ता खुला, मेरे जज्बे को पंख लग गए।
फिर क्या मैंने बीएचयू के 7 यूपी एयर एनसीसी में कैडेट कॉमन एप्टीट्यूड टेस्ट क्वालिफाई किया। जुलाई 2016 से हैदराबाद में फाइटर पायलट बनने की ट्रेनिंग शुरू हुई।
पिता कुमारेश्वर सिंह और मां सीमा सिंह बेटी की इस बड़ी उपलब्धि पर कितने खुश हैं, ये वो बयां नहीं कर सकते। मां का कहना है कि बेटी ने बेटे से भी बड़ा काम किया है। भाई मयंक सिंह नौवीं कक्षा में है और वो भी आर्मी में ही जाना चाहता है।
शिवांगी सिंह का कहना है कि लड़कियों के लिए बस यही संदेश कि वो जो लक्ष्य बनाएं, उस पर आगे बढ़ें। ये कभी ना सोचें कि ये मेरे लायक है या नहीं, मैं कर सकूंगी या नहीं। मैं यही चाहती हूं कि लड़कियां मेरे पीछे आएं। अभी हम पांच हैं। चाहती हूं कि भविष्य में आसमां में भी हमारी ही बादशाहत हो।