बीएचयू में आए दिन हो रहे बवाल को लेकर सिर्फ मुकदमे दर्ज होते रहे हैं। अगर बात की जाए गिरफ्तारियों की तो कुछ लोगों को गिरफ्तार कर खानापूर्ति हो रही है।
बीएचयू परिसर और आसपास के इलाकों में बीते दो साल में हुए उपद्रव और बवाल की घटनाओं में लंका थाने में 45 मुकदमे दर्ज किए गए लेकिन गिरफ्तारी 15 आरोपियों की भी नहीं की जा सकी।
जानकारों का कहना है कि परिसर में बार-बार के उपद्रव के बावजूद सिर्फ कागजी कार्रवाई तक पुलिस के सीमित रह जाने के कारण अराजकता बढ़ी है। पहले से दर्ज मुकदमों में प्रभावी कार्रवाई हुई होती तो हालात ऐसे नहीं होते।
बीएचयू के छात्रों के खिलाफ हिंसक घटनाओं को लेकर लंका थाने में बीते दो साल में दर्ज 45 मुकदमों में से चार-पांच मामलों को छोड़ दिया जाए तो अधिकतर में आरोपियों की गिरफ्तारी तो दूर, उन्हें चिह्नित भी नहीं किया जा सका है।
अभी पिछले 23 सितंबर को बीएचयू परिसर में छात्रों ने पुलिस पर बम फेंके थे। जमकर तोड़फोड़ और आगजनी की थी। इस मामले में एक हजार अज्ञात छात्रों के खिलाफ लंका थाने में मुकदमा दर्ज किया गया लेकिन तफ्तीश में जुटी क्राइम ब्रांच तीन महीने बाद भी सिर्फ बयान दर्ज करने तक ही सीमित है।
इसी वर्ष फरवरी महीने में बीएचयू स्थित विश्वनाथ मंदिर और सिंह द्वार पर, अप्रैल में भारतेंदु हॉस्टल और राजाराम हॉस्टल के छात्रों के बीच और सितंबर में छात्रा के साथ रैगिंग की घटना के बाद पथराव और जमकर मारपीट हुई थी लेकिन आरोपियों को अब तक चिह्नित नहीं किया जा सका।
इस बारे में एसएसपी राम कृष्ण भारद्वाज ने बताया कि लंका थानाध्यक्ष को निर्देशित किया गया है कि सभी मामलों की विवेचना में तेजी लाएं और आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करें।