दोपहर में हुई आरती देखने बड़ी संख्या में लोग जुटे
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चूड़ामणि योग में लगे खंड चंद्रग्रास के चलते सोमवार को धर्म नगरी काशी में गंगा आरती दिन में ही कर ली गई। दशाश्वमेध घाट और शीतला घाट पर गंगा आरती चंद्रग्रहण का सूतक लगने से पहले दोपहर 12:40 बजे आरंभ हुई।
नेपाली तीर्थ पुरोहितों ने गंगा तट पर सविधि पूजन केबाद संगीतमय गुग्गुल दशांग और कपूर से महाआरती की। तीर्थ पुरोहितों के अनुसार निर्णय सिंधु, ज्योतिष संग्रह, मुहूर्त चिंतामणी में दिए गए समाधान के आधार पर काशी के इतिहास में 26 वर्ष बाद गंगा आरती की रस्म दिन में पूरी कराई गई।
1991 में पहली बार दशाश्वमेध घाट पर गंगा आरती शुरू हुई थी। रात को 10:52 बजे चंद्रग्रहण लगने से वैदिक रीति के अनुसार नौ घंटा पूर्व दोपहर 1:52 बजे सूतक काल लग गया। सूतक लगने के साथ ही दुर्गा मंदिर, संकट मोचन मंदिर, मानस मंदिर समेत अन्य प्रमुख मंदिरों के कपाट बंद कर दिए गए।
पौराणिक मान्यता के अनुसार ग्रहण से पूर्व देवालयों के कपाट बंद होने की परंपरा है। इसे देखते हुए दशाश्वमेध घाट पर होने वाली विश्व प्रसिद्ध दैनिक गंगा आरती भी सूतक काल से पहले कराई गई।
गंगा सेवा निधि के अध्यक्ष सुशांत मिश्र ने बताया कि मंगलवार से दशाश्वमेध घाट पर होने वाली गंगा आरती अपने निर्धारित समय से ही प्रारंभ होगी। आरती के मौके पर आशीष तिवारी, हनुमान यादव एवं सुरजीत कुमार सिंह उपस्थित रहे।
इसी तरह शीतला घाट पर भी गंगा आरती सूतक काल से पहले कराई गई। गंगोत्री सेवा समिति की ओर से शीतला घाट पर गंगा आरती सूतक काल से पहले कराई गई। इस मौके पर समिति के अध्यक्ष पं किशोरी रमन दुबे, बाबू महाराज और दिनेश शंकर दुबे समेत तमाम वैदिक विद्वान उपस्थित थे। अस्सी घाट पर भी गंगा आरती दोपहर में कराई गई।