जब बच्चों को उन्होंने बताया कि बिस्किट डीएम अंकल ने उनके लिए भेजे हैं, तो बच्चों के चेहरे पर मुस्कान देखने लायक थी। अनमने ढंग से भोजन का पैकेट पकड़ने वाले बच्चे अब बिस्किट का पैकेट खुश होकर पकड़ते हैं। बच्चों ने डीएम अंकल को धन्यवाद कहा। आपने हमारे मन की बात सुन ली। गरीबी रेखा के नीचे जीने वाला परिवार भले ही भूख से संघर्ष कर रहा है, लेकिन बिस्किट का पैकेट पाकर अपने बच्चों को चहकते देखकर उनकी भी खुशी का ठिकाना नहीं रहता।
बांसफोर बस्ती हुकुलगंज की विमला का 5 वर्षीय पोता बादल और पोती सुंदरी बिस्किट पाकर फूले नहीं समाते। विमला कहती हैं कि कौन गरीबों की सुनता है। जहां खाना खाने का संकट हो, वहां हमारे बच्चों के लिये बिस्किट मिलना दिल खुश कर देता है। गरीबों के बच्चों का ध्यान रखने के लिये डीएम साहब को हम अपनी दुआ ही दे सकते हैं।
अनाज बैंक के भोजनदूत भोजन का पैकेट तो ले ही जाते हैं, बच्चों के लिये बिस्किट का पैकेट ले जाना नहीं भूलते और यह बताते हैं कि बच्चों के लिये डीएम कौशल राज शर्मा कितने चिंतित हैं।
अनाज बैंक के संस्थापक चेयरमैन डा० राजीव श्रीवास्तव ने कहा कि बच्चों के प्रति डीएम कौशल राज शर्मा की संवेदनशीलता प्रशंसनीय है। अभावग्रस्त और वंचित बच्चों को संकट के दौर में बिस्किट देना उनके प्रति अथाह स्नेह का प्रतीक है। गरीब बच्चों के लिये डीएम एक अभिभावक की तरह सोचते हैं। यह खुशी की बात है।
अनाज बैंक के संस्थापक संरक्षक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य इन्द्रेश कुमार ने अपने संदेश में कहा है कि गरीब बच्चों की भावनाओं को समझना दिल को छू लेने वाला है। डीएम कौशल राज शर्मा की तरह अन्य लोगों को भी बच्चों के लिये संवेदनशील होना चाहिए।