काशी में कल्चरल हेरिटेज के संरक्षण का सपना अब साकार होगा। प्राचीन तीर्थ नगरी में संगीत, कला, साहित्य जगत की नामचीन हस्तियों के अलावा विश्व समुदाय के लिए आकर्षण का केंद्र बने गंगा घाटों, संकरी गलियों के अलावा परंपराओं को संरक्षित किया जाएगा।
इसमें रामनगर की जग विख्यात रामलीला और कजरी भी शामिल है। इस तरह की 34 मूर्त और अमूर्त धरोहरों पर आधारित मोनोग्राफ प्रकाशित किए जाएंगे। यह योजना केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय ने बनाई है।
बनारस की सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण और उत्थान के लिए दो वर्ष पूर्व जिले के 32 कॉलेजों में संगीत, कला, धर्म, साहित्य से जुड़ी हस्तियों से जुड़े कार्यक्रमों की शृंखला आयोजित की गई थी। अब उन विभूतियों और स्थलों को सूचीबद्ध कर लिया गया है।
संस्कृति मंत्रालय के सांस्कृतिक स्रोत एवं प्रशिक्षण केंद्र के निदेशक गिरीश जोशी ने सचिव के साथ हाल में ही काशी का दौरा कर इस संबंध में तैयार किए गए विजन डाक्यूमेंट का अध्ययन किया था।
जल्द ही दिल्ली में इसे मूर्त रूप देने के लिए बैठक होगी। सेंटर ऑफ कल्चरल रिसोर्स एंड ट्रेनिंग की ओर से काशी के कल्चरल हेरिटेज का समन्वयक रूपवाणी के निदेशक व्योमेश शुक्ल को बनाया गया है।
कल्चरल हेरिटेज की थीम पर आधारित होंगे कार्यक्रम
लोक नृत्य और संगीत महोत्सव
- फोटो : ICCR
कल्चरल हेरिटेज के दृष्टि पत्र को अंतिम रूप दिया जा चुका है। इसके तहत विभूतियों और धरोहर के रूप में संरक्षित किए जाने वाले स्थलों, परंपराओं पर लघु पुस्तिकाएं प्रकाशित की जाएंगी। इसके अलावा दश भर के कलाकारों, संगीतकारों, रंगमंडलों को आमंत्रित कर कल्चरल हेरिटेज की थीम पर आधारित कार्यक्रमों की शृंखला आयोजित की जाएगी।
महापुरुषों के अवदान पर व्याख्यान भी होंगे। कल्चरल हेरिटेज, आईसीआरटी के कोआर्डिनेटर व्योमेश शुक्ल ने कहा कि बनारस संसार की सबसे प्राचीनतम सभ्यताओं में से एक है।
नई पीढ़ी के मन में इस सभ्यता-संस्कृति के महत्व को रेखांकित करने के लिए केंद्र सरकार के संस्कृति मंत्रालय ने व्यापक विचार-विमर्श के बाद 34 महान हस्तियों, परंपराओं, कला रूपों को सहेजने और परिचित कराने की योजना बनाई है।