ठगी की औसत रकम 5 हजार से 1.5 लाख रुपये डिजिटल अरेस्ट में ज्यादा कमाई
साइबर फ्रॉड करने वाले रोजाना 100-130 लोगों से संपर्क करते थे। इसमें निवेश, प्रलोभन और झांसा देने समेत योजनाओं के बारे में फर्जी विज्ञापन दिखाकर ठगी की जाती थी। जबकि फर्जी कॉल सेंटर में काम करने वाले निवेश और शेयर मार्केट ट्रेडिंग के जरिये फ्रॉड करते थे। ठगी की औसत रकम 5 हजार से 1.5 लाख रुपये तक रही, जबकि कुछ मामलों में 40 लाख रुपये तक की ठगी की गई।
साइबर सेल की जांच में सामने आया कि कम पढ़े-लिखे आरोपियों में झारखंड के जामताड़ा, छत्तीसगढ़ और ओडिशा के कुछ क्षेत्रों के लोग शामिल हैं। बनारस में हुए फ्रॉड में गिरफ्तार साइबर अपराधी खासकर झारखंड के देवघर, धनबाद, पश्चिम बंगाल के मालदा और जामताड़ा, बिहार के पटना, नालंदा, छत्तीसगढ़ के अलावा स्थानीय नेटवर्क से जुड़े थे।
साइबर अपराधी रोज नया तरीका अपनाते हैं। पुलिस उनके पैटर्न, कॉल डिटेल, बैंकिंग ट्रेल और आईपी एड्रेस के आधार पर नेटवर्क को खंगाल रही है। साइबर फ्रॉड में 96 साइबर ठगों की गिरफ्तारी की गई है। बाकी की जांच साइबर सेल कर रही है। - विदुष सक्सेना, एसीपी साइबर