नाराजगी जता रहे लोग सिर्फ मारपीट का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग पर अड़े रहे। कुछ देर बाद जब स्थिति सामान्य हुई तब पता चला कि असल मसला वन विभाग की जमीनों पर की जा रही जोतकोड़ से बेदखल किए जाने का है।
इसी बात को लेकर सोनभद्र के साथ ही मिर्जापुर चंदौली के भी ढेरों ग्रामीण पहुंचे हुए थे। पहले एसडीएम से मिलने की तैयारी थी। जब उन्हें यह पता चला कि रविवार को मुलाकात नहीं हो पाएगी तब सदर कोतवाली पर धमक पड़े। अचानक से बड़ी संख्या में आदिवासियों के पहुंचने के मामले ने वहां मौजूद हर किसी को भौंचक कर दिया। देर तक यहां पहुंचने का असल कारण जानने की कोशिश होती रही।
प्रभारी निरीक्षक रामस्वरूप वर्मा ने बताया कि आदिवासियों को डर था कि वन विभाग की जिन जमीनों पर उनका कब्जा है, उससे उन्हें बेदखल कर दिया जाएगा। इसी मसले को लेकर वह अफसरों से मिलने के लिए पहुंचे हुए थे। रविवार का दिन होने के कारण अफसर नहीं मिले तो अगुवाई कर रहे लोग उन्हें लेकर कोतवाली पहुंच गए। सभी को समझा-बुझाकर वापस कर दिया गया।