चंद रुपये के लालच में घूस लेने के आरोप में 22 सरकारी मुलाजिमों को अदालत ने तीन से लेकर पांच साल तक की सजा सुनाई। एक मामले में सरकारी कर्मी ने 200 रुपये की घूस ली और 25 गुना यानी पांच हजार रुपये जुर्माना भरा। साथ ही पांच साल की सजा भी मिली।
अमीन से लेकर दलाल, बाबू से हवलदार और दरोगा से लेखपाल तक शामिल रहे। किसी ने काम कराने के एवज में पैसे मांगे तो कोई विवेचना और प्राथमिकी में नाम हटवाने के लिए मांग रहा था। अदालत इन मामलों में पांच साल के अंदर सजा दी। अदालत में तमाम दलील देने के बाद भी आरोपी खुद को निर्दोष साबित नहीं कर सके। रिश्वत और अपराध के हिसाब से अदालत ने किसी को दो तो किसी को पांच साल तक की सजा दी। कुछ मामले ऐसे में भी रहे जिसमें रिश्वत की रकम छोटी रही लेकिन अपराध के लिहाज से जुर्माना 10 गुना रहा।
एंटी करप्शन, सीबीआई और विजिलेंस की टीम ने हर दूसरे महीने रिश्वत लेते सरकारी मुलाजिमों को रंगेहाथ पकड़ा। कुछ महिला समेत बड़े विभाग के कर्मचारी शामिल रहे। हालिया मामला 15 जुलाई का है। जीएसटी उपायुक्त अंबिका को एंटी करप्शन की टीम ने 50 हजार रुपये लेते गिरफ्तार किया था। 19 जून को उद्योग विभाग का सहायक प्रबंधक श्रीपाल को विजिलेंस की टीम ने पांच हजार रुपये पकड़ा था।
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23 जुलाई में नितेश अग्रवाल सीनियर डीएमएम को सीबीआई की एंटी करप्शन की टीम ने बरेका आवास से गिरफ्तार किया। आरोपी ने एक लाख 70 हजार रुपये मांगे थे। इसी तरह 12 मामलों में टीम ने अलग-अलग विभागों से गिरफ्तारी की और मामला जांच के साथ ही कोर्ट में है।