निर्माण कार्य जिन प्रमुख घाटों पर चल रहा है, उनमें मीरघाट, प्रभु घाट, मानमंदिर घाट, राजेंद्र प्रसाद घाट, मानमहल घाट, त्रिपुरा भैरवी घाट, लाल घाट, गायघाट, राजघाट, राणा महल घाट और हनुमान घाट समेत कुल 35 घाट शामिल हैं। योजना पूरी होने के बाद बाढ़ के दौरान भी श्रद्धालु और पर्यटक एक घाट से दूसरे घाट तक आसानी से पहुंच सकेंगे।
जानकारों के अनुसार, बाढ़ के समय सबसे अधिक परेशानी काशी विश्वनाथ धाम आने वाले श्रद्धालुओं को होती है। ललिता घाट से दशाश्वमेध घाट तक जाने के दौरान मानमहल और मीरघाट के बीच का मार्ग काफी संकरा हो जाता है, जिससे आवागमन बाधित होता है। नए प्लेटफॉर्म और रैंप बनने से इस समस्या का समाधान होगा और भीड़ का दबाव भी कम किया जा सकेगा।
जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार ने बताया कि बाढ़ के दौरान श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो और गंगा के घाटों का आपसी संपर्क बना रहे, इसे ध्यान में रखकर यह कार्य कराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि परियोजना पूरी होने के बाद बाढ़ के समय भी श्रद्धालु आसानी से दर्शन-पूजन और गंगा आरती में शामिल हो सकेंगे, जिससे धार्मिक पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।