आरोपियों ने बताया कि खाताधारकों से पासबुक, एटीएम कार्ड, चेकबुक और ओटीपी हासिल कर लेते थे। साइबर ठगी से मिली रकम इन्हीं खातों में मंगाई जाती थी और फिर एटीएम व यूपीआई से निकालकर दूसरे खातों में भेज दी जाती थी।
गिरोह अलग-अलग राज्यों के बैंक खातों का इस्तेमाल करता था, ताकि पुलिस आसानी से उन तक न पहुंच सके। रोहित के पास से एक मोबाइल और 110 रुपये, धीरेंद्र के पास से एक मोबाइल और 320 रुपये और सोनू के कब्जे से दो मोबाइल फोन, बैंक ऑफ महाराष्ट्र का एक एटीएम कार्ड और 24,450 रुपये मिले।