प्रदीप के मुताबिक, उन्होंने कंपनी के निदेशक अविनाश उपाध्याय को चौथी मंजिल स्थित फ्लैट के लिए 25 लाख रुपये दिए थे। 20 अगस्त 2020 को इसके संबंध में नोटरी समझौता भी किया गया। समझौते में राघवेंद्र प्रताप सिंह, राम द्विवेदी और विवेक उपाध्याय को गवाह बनाया गया था। इसके बाद तीन सितंबर 2020 को फ्लैट में गृह प्रवेश की पूजा भी कराई गई।
याचिकाकर्ता का आरोप है कि बाद में जब वह फ्लैट की रजिस्ट्री कराने पहुंचे तो अविनाश उपाध्याय टालमटोल करने लगे। प्रदीप के अनुसार, जब वह फ्लैट में रहने गए तो राघवेंद्र प्रताप सिंह ने फ्लैट पर अपना अधिकार जताते हुए उन्हें बाहर निकाल दिया और ताला लगा दिया। आरोप है कि अविनाश उपाध्याय और राम द्विवेदी ने भी राघवेंद्र के दावे की पुष्टि की।
इसके बाद प्रदीप को छह और सात लाख रुपये के दो चेक दिए गए, लेकिन दोनों चेक बाद में बाउंस हो गए। राघवेंद्र की ओर से व्हाट्सएप पर भेजे गए कथित अनुबंध पत्र में बताया गया कि रकम संतोष दुबे नामक कंपनी निदेशक ने ली है। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि आरोपियों ने डॉ. हंसराज विश्वकर्मा का नाम लेकर उन्हें डराया-धमकाया।
प्रदीप ने 22 जुलाई 2025 को पुलिस आयुक्त से शिकायत की थी, लेकिन कार्रवाई नहीं होने पर अदालत की शरण ली। अदालत ने अब छह लोगों के खिलाफ परिवाद दर्ज करने का आदेश दिया है। राज्यमंत्री डॉ. हंसराज विश्वकर्मा का पक्ष जानने के लिए फोन किया गया, लेकिन संपर्क नहीं हो सका।