मंडलायुक्त ने कहा कि जनवरी की शुरुआत से केवल प्रोटोकॉल व्यवस्था के दुरुपयोग को रोकने का प्रयास प्रारंभ हुआ है। गत 3-4 माह से विभिन्न विभागों द्वारा अपने कर्मचारियों व अधिकारियों के माध्यम से प्रोटोकॉल हेतु बनाए गए सेल के माध्यम से दर्शन न कराकर सीधे करा दिया जा रहा था। मंदिर की स्टेट लेवल सिक्योरिटी कमेटी ने काफी महीनों पहले इसके लिए ट्रस्ट, पुलिस और सीआरपीएफ की एक जॉइंट सेल की व्यवस्था की है जो गेट नंबर चार के भीतरी हिस्से में है। प्रोटोकॉल के लोग वहां से दर्शन हेतु भेजे जाते हैं। जो लोग वहां गलत आ जाते हैं उनसे 300 रुपये लेकर सुगम दर्शन कराया जाता है।
प्रोटोकॉल की व्यवस्था के उल्लंघन से होती है दिक्कत
मंडलायुक्त ने कहा कि प्रोटोकॉल की बनाई गई व्यवस्था का उल्लंघन करने से कामकाज अनुशासित नहीं रहता। जो लोग सुगम दर्शन करने में सक्षम हैं और प्रोटोकॉल के अंतर्गत नहीं आते, उनके इस प्रकार निशुल्क दर्शन से मंदिर की आय में फर्क पड़ता है। मंदिर में प्रोटोकॉल दर्शन जिन विभागों के माध्यम से ज्यादा होते हैं उनको कहा गया था कि प्रोटोकॉल के नाम पर अन्य लोगों को दर्शन न कराएं और उस पर रोक लगाएं।
अखिलेश यादव ने किया था ट्वीट
चौक थाने के दरोगा आशीष सिंह बीते चार जनवरी को पांच श्रद्धालुओं को बगैर प्रोटोकॉल पर्ची या सुगम दर्शन पर्ची के बाबा विश्वनाथ के स्पर्श दर्शन कराए थे। इसे लेकर पांच जनवरी को काशी विश्वनाथ मंदिर के एसडीएम शंभू कुमार ने उनके वेतन से कटौती कर प्रोटोकॉल की धनराशि न्यास के कोष में जमा कराने का अनुरोध पुलिस आयुक्त से किया था। छह जनवरी को यह प्रकरण सार्वजनिक हुआ तो सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर ट्वीट किया, सुना है वीआईपी दर्शन करवाने गए एक पुलिसकर्मी को जुर्माने के रूप में अपनी जेब से टिकट का पैसा देने का आदेश वाराणसी के डिप्टी कलेक्टर साहब ने पारित किया है।