बीएचयू में बवाल के मामले में वाराणसी के कमिश्नर रमेश नितिन गोकर्ण ने प्रारंभिक रिपोर्ट सौंप दी है। रिपोर्ट में सीधे तौर पर यूनिवर्सिटी प्रशासन को जिम्मेदार ठहराया गया है।
न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक कमिश्नर ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि यूनिवर्सिटी ने पीड़ित छात्रा की शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया और न ही मामले की संवेदनशीलता को समझा। रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि यूनिवर्सिटी प्रशासन ने इसके बाद भी लापरवाही बरती और स्थिति को समय रहते काबू करने के लिए कदम नही उठाए।
Varanasi Commissioner in report to Chief Secy says #BHU did not deal with victim complaint in sensitive manner,nor handled situation on time
— ANI UP (@ANINewsUP) September 26, 2017
सूत्रों के मुताबिक रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि बीएचयू प्रशासन ने अगर धरने के पहले दिन ही छात्र-छात्राओं से संवाद किया गया होता तो परिसर में उपद्रव के हालात नहीं बनते। संवाद न होने से नाराजगी बढ़ गई और आंदोलन बढ़ गया।
यह भी बताया गया है कि कानून व्यवस्था ठीक होने और धरना शांतिपूर्ण होने का दावा करते हुए प्रशासनिक अधिकारियों ने भी पूरे मामले से दूरी बनाए रखी। जिला प्रशासन ने भी यदि शुरुआत में ही बीएचयू प्रशासन से वार्ता कर हल निकालने की कोशिश की होती तो छात्राओं की सुरक्षा की मांग को लेकर शुरू हुआ आंदोलन उग्र नहीं होता।
उल्लेखनीय है कि शनिवार रात परिसर हुए पथराव, लाठीचार्ज, बमबाजी, आगजनी और फायरिंग के मामले में रविवार को प्रशासन से रिपोर्ट मांगी थी। इसी मामले में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने छात्र-छात्राओं पर लाठीचार्ज की घटना की जांच कराने का निर्देश कमिश्नर नितिन रमेश गोकर्ण को दिया है। उनसे मीडियाकर्मियों की पिटाई पर भी रिपोर्ट मांगी गई है।