वाराणसी। अतीव सुंदरतया कंदुक प्रक्षेपणेन, फलक धारक: स्तब्धोजात: कंदुक: सीमा रेखाया: बहिर्गमनम चतुर्धावनांक: लब्ध:। बृहस्पतिवार को कुछ इसी तरह की क्रिकेट मैच की कमेंट्री संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के खेल मैदान सुनने को मिली। जिसका अर्थ है, खूबसूरत गेंदबाजी से बल्लेबाज चकित हो गया, गेंद सीमा रेखा के बाहर, और चार रन मिले।
प्रतियोगिता में जहां संस्कृत में कमेंट्री ही नहीं बल्कि टीम के खिलाड़ी की वेशभूषा भी खास थी। खिलाड़ी रंगीन धोती कुर्ता पहनकर बल्लेबाजी और क्षेत्ररक्षण करते हुए नजर आए। दरअसल संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के मैदान पर संस्कृत संवर्धन के लिए समर्पित दशाश्वमेध स्थित श्री शास्त्रार्थ महाविद्यालय के 77वें स्थापनोत्सव पर आयोजित संस्कृत क्रिकेट प्रतियोगिता हुई।
इसमें सभी बटुक खिलाड़ी अपने पारंपरिक गणवेश धोती व कुर्ता में टीका-त्रिपुंड लगाकर मैदान पर क्रिकेट खेलने उतरे। मैदान में उपस्थित दर्शकों में भी इस मैच को पूरा देखने के लिए काफी उत्साह था। इन सबसे अलग मैच का सबसे रोमांचक पहलू कमेंट्री का दिखी जो संस्कृत भाषा में हो रही थी। जिसे शास्त्रार्थ महाविद्यालय के 65 वर्षीय वयोवृद्ध वरिष्ठ आचार्य डा. शेषनारायण मिश्र कर रहे थे। जिनकी शब्द वाणी से ऐसा लग रहा था मानो खेल मैदान में शास्त्रार्थ चल रहा हो। मैच में अंपायरिंग करने वाले पूर्व खिलाड़ी धीरज मिश्र व अनुज तिवारी भी भगवा धोती व रुद्राक्ष की माला धारण किए हुए थे।
आयोजन समिति के संयोजक पवन शुक्ला ने बताया कि प्रतियोगिता में जिले की चार टीमों ने प्रतिभाग किया था। जिसके फाइनल मुकाबले में मैच शास्त्रार्थ महाविद्यालय व इंटरनेशनल चंद्रमौलि सोसायटी के बीच खेला गया। पहले खेलते हुए चंद्रमौलि सोसायटी ने सात विकेट पर 44 रन बनाया वहीं शास्त्रार्थ महाविद्यालय ने मात्र तीन विकेट खोकर के छठे ओवर में ही मैच को जीत लिया। मैन आफ द मैच शास्त्रार्थ के अखिलेश पांडेय रहे। एकदिवसीय मैच का उद्घाटन शास्त्रार्थ महाविद्यालय के प्राचार्य व संयोजक डॉ. गणेश दत शास्त्री ने किया। इस अवसर पर कुलपति राजाराम शुक्ल, आचार्य विकास दीक्षित, डॉ. राघवशरण मिश्र, डा. अशोक पांडेय आदि उपस्थित थे।