वाराणसी। भाई-बहन के प्यार का त्योहार रक्षा बंधन तीन अगस्त को मनाया जाएगा। त्योहार को लेकर बाजार में राखी की दुकानें सजनी शुरू हो गई हैं। हालांकि कोरोना के चलते पिछले साल की तरह बाजार में रौनक नहीं है। खास बात यह है कि भाइयों की कलाइयों पर अबकी बार चीनी राखियां नहीं दिखेंगी। व्यापारियों ने इस बार चीन निर्मित राखी का बहिष्कार कर दिया है।
कोलकाता, राजकोट और मुंबई से बनी राखियां ही बाजार में बिक रही हैं। चौक, नारियल बाजार, दालमंडी, नई सड़क, चेतगंज, लहुराबीर, सिगरा आदि इलाकों में राखी की दुकानें सज चुकी हैं। वाराणसी में आठ से 10 करोड़ रुपये का राखी का कारोबार होता है। यहां से पूर्वांचल सहित बिहार के विभिन्न इलाकों में राखी भेजी जाती है। राखी कारोबारियों के अनुसार चीन की चालबाजी को देखते हुए चीन निर्मित माल का बहिष्कार कर दिया गया। कोरोना के चलते माल का ऑर्डर तक नहीं दिया गया था।
राखी के बाजार पर भी चीन का कब्जा रहता है। हालांकि इस बार चीन निर्मित राखियां व्यापारियों ने नहीं मंगाई। व्यापारियों के अनुसार इलेक्ट्रॉनिक राखी, आर्टिफिशियल ज्वेलरी निर्मित राखी, टेडी बियर और डिशेज राखियां काफी आकर्षित करती है। यह सब चीन से भारतीय बाजारों में आता है।
राखी का वाराणसी देश में सबसे तीसरा बड़ा बाजार है। व्यापारियों के अनुसार पहला कोलकाता, दूसरा राजकोट और तीसरा सबसे बड़ा बाजार वाराणसी ही है। हर तरह की डिजाइनर राखियां यहां मिलती हैं।